महंगाई और मॉनसून

Updated at : 17 Jun 2016 6:29 AM (IST)
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महंगाई और मॉनसून

खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेज बढ़ोतरी हो रही है. मई महीने में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति 7.55 फीसदी आंकी गयी है, जबकि पिछले साल मई में यह मात्र 4.80 फीसदी थी. आर्थिक मामलों के जानकारों को इसमें तत्काल कमी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है. हाल में दलहन और […]

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खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में पिछले कुछ समय से तेज बढ़ोतरी हो रही है. मई महीने में खुदरा खाद्य मुद्रास्फीति 7.55 फीसदी आंकी गयी है, जबकि पिछले साल मई में यह मात्र 4.80 फीसदी थी. आर्थिक मामलों के जानकारों को इसमें तत्काल कमी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है.
हाल में दलहन और तेलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की गयी है, जिसका असर आगामी दिनों में मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है. मॉनसून की मौजूदा स्थिति से भी नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं. जून के पहले पखवाड़े में देशभर में 43.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो 55.7 मिलीमीटर के सामान्य स्तर से 22 फीसदी कम है.
मध्य भारत में तो यह कमी 52 फीसदी है. पिछले साल की तुलना में इस बार फसलों की रोपाई की गति धीमी है. हालांकि अच्छे मॉनसून की उम्मीदें अब भी बरकरार हैं, पर महंगाई और सूखे को देखते हुए खाद्य पदार्थों की समुचित आपूर्ति को सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है. अनेक राज्यों में दो वर्षों से जारी सूखे और कमजोर मॉनसून ने ग्रामीण अंचलों में आमदनी को बुरी तरह से प्रभावित किया है. अर्थव्यवस्था में अपेक्षित गति न होने के कारण शहरी गरीब भी परेशान हैं. ऐसे में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें उनके लिए बड़ी त्रासदी है. इन कीमतों का असर अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर पड़ता है.
मई में थोक मूल्य सूचकांक 7.9 फीसदी तक पहुंच गया, जिस कारण रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती नहीं की. चिंताजनक बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें इस स्थिति की संभावना से परिचित होते हुए भी समुचित कदम उठाने में असफल रही हैं. डीजल की कीमतों में नियमित बढ़ोतरी भी खाद्य पदार्थों के दामों को प्रभावित करती है, क्योंकि इससे ढुलाई की लागत बढ़ जाती है.
केंद्र सरकार ने भंडारण और नियंत्रित वितरण के जरिये दालों की कीमतें कम रखने के उपायों की घोषणा की है, पर अभी तक लोगों को राहत नहीं मिल सकी है. खाने-पीने की अन्य वस्तुओं के बारे में अभी तक कुछ नहीं किया गया है. यदि अगले कुछ दिनों में सरकार ने ठोस उपाय करने में देरी की और मॉनसून का रवैया अनिश्चित रहा, तो बढ़ती महंगाई अर्थव्यवस्था को गंभीर चोट पहुंचा सकती है.
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