महिला शिक्षा की दिशा में बड़ी पहल

Published at :11 Jan 2014 4:05 AM (IST)
विज्ञापन
महिला शिक्षा की दिशा में बड़ी पहल

महिला सशक्तीकरण के इस दौर में महिला यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पहल उत्साहित करने वाली है. विचार के स्तर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी वकालत की है. अब जरूरत इस बात की है कि इसे मूर्त रूप दिया जाये. इसके लिए संबंधित पक्षों को बगैर समय गंवाये पूरी ताकत लगा देनी चाहिए. यह इस […]

विज्ञापन

महिला सशक्तीकरण के इस दौर में महिला यूनिवर्सिटी स्थापित करने की पहल उत्साहित करने वाली है. विचार के स्तर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसकी वकालत की है. अब जरूरत इस बात की है कि इसे मूर्त रूप दिया जाये. इसके लिए संबंधित पक्षों को बगैर समय गंवाये पूरी ताकत लगा देनी चाहिए. यह इस लिहाज से भी जरूरी है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के विभिन्न कदमों को उठा पाने में हमें अब भी बहुत कुछ करना है.

अब से कोई 95 साल पहले महाराष्ट्र में देश का पहला महिला विश्वविद्यालय खुला था. यह 1916 की बात है. 1920 में उसका नाम श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरे वीमेंस यूनिवर्सिटी रख गया था. कुछ लड़कियों की पढ़ाई के साथ शुरू हुई यात्र का नतीजा यह है कि आज इस यूनिवर्सिटी में 70 हजार से ज्यादा लड़कियां अलग-अलग विषयों में पढ़ाई कर रही हैं. कहा जाता है कि जिस घर में पढ़ी-लिखी महिलाएं होती हैं, वहां बच्चों को पढ़ाई का माहौल मिल जाता है और वे पढ़ाई के प्रति प्रेरित होते हैं.

जाहिर है, इसके पीछे घर की महिला का बड़ा योगदान होता है. पर राज्य में महिला शिक्षा को लेकर अभी चुनौतियां बड़ी हैं. यह ठीक है कि साक्षरता दर साल-दर-साल बढ़ रही है. पर इतना काफी नहीं है. स्कूल के बाद लड़कियों की आगे की पढ़ाई बहुत मुश्किल हो जाती है. आंकड़ों में देखें तो दसवी और बारहवीं के 75-80 फीसदी लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं. ये आंकड़े हमारे समाज की मन:स्थितियों के बारे में क्या संकेत नहीं करते? लड़कियों की स्कूली पढ़ाई होते-होते उनका घर बसाने की फिक्र होने लगती है. हम उससे आगे की सोच ही नहीं पाते.

हम नहीं सोच पाते कि उन्हें कॉलेज और उच्च शिक्षा देना कितना जरूरी है. हालांकि हाल के दिनों में स्कूलों के प्रति लड़कियों का रुझान बड़ी तेजी से बढ़ा है. इसमें सरकार की कई योजनाओं की भूमिका मानी जाती है. लेकिन इससे भी बड़ा यथार्थ यह है कि परिवार और समाज को महिला शिक्षा के बारे में अपना नजरिया साफ रखना पड़ेगा. लड़कियों के खिलाफ होने वाली किसी भी हिंसा के खिलाफ समाज से ही आवाज उठनी चाहिए. उन्हें कुपोषण से बचाने की जिम्मेदारी किसकी है? दरअसल, जहां कहीं भी समाज बदला है, तो उसमें केंद्रीय भूमिका वहां के लोगों की रही है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola