रटंत विद्या भी कम महत्वपूर्ण नहीं

।। शैलेश कुमार।। (प्रभात खबर, पटना) जाड़े का दिन है. लोग धूप में रहना पसंद करते हैं. पड़ोस के घर की छत पर कुछ महिलाएं इकट्ठा थीं. बच्चों को लेकर बातें चल रही थीं. इसी क्रम में एक महिला बोली, मेरे लड़का ‘रट्ट तोता’ बन गया है. एग्जाम में अच्छे नंबर तो ले आता है, […]
।। शैलेश कुमार।।
(प्रभात खबर, पटना)
जाड़े का दिन है. लोग धूप में रहना पसंद करते हैं. पड़ोस के घर की छत पर कुछ महिलाएं इकट्ठा थीं. बच्चों को लेकर बातें चल रही थीं. इसी क्रम में एक महिला बोली, मेरे लड़का ‘रट्ट तोता’ बन गया है. एग्जाम में अच्छे नंबर तो ले आता है, लेकिन मैं चिंतित हूं कि रटने से कब तक उसका काम चलेगा? उनकी बातें सुन मेरा ध्यान कुछ दिनों पूर्व घटी एक घटना की ओर चला गया, जो मेरे एक परिचित के साथ घटी थी.
हुआ यूं कि वे ऑफिस में थे. इसी बीच उनका करीब चार साल का लड़का बच्चोंवाली साइकिल चलाते हुए घर से थोड़ी दूर निकल गया. किसी काम में व्यस्त होने की वजह से मां की नजर उस पर नहीं पड़ी. सड़क पर बच्चा एक बड़ी गाड़ी के नीचे आने से बचा. चूंकि वह घर से ज्यादा दूर निकल गया था, इसलिए लोगों को पता नहीं चला कि उसके मां-बाप कौन हैं. एक न्यूज चैनलवाले उसे अपने साथ ले कर चले गये. इसी क्रम में किसी ने उससे अंग्रेजी में पूछा, बाबू वाट इज योर नेम? बच्चे ने जवाब दिया, माइ नेम इज प्रियांशु. बच्चे से अगला प्रश्न पूछा गया, वाट इज योर फादर्स नेम?
बच्चे ने कहा, माइ फादर्स नेम इज अशोक कुमार. बच्चे से अगला प्रश्न भी अंग्रेजी में ही उसके पिता के जॉब से संबंधित पूछा गया और बच्चे ने अंग्रेजी में सही जवाब भी दे दिया. इससे उसके पिताजी को आसानी से ढूंढ़ निकाला गया और वो अपने बच्चे को ले कर चले गये. वास्तव में बच्चे ने अपनी समझ से ये जवाब नहीं दिये, बल्कि उसे जो रटाया गया था, उसने बता दिया. जिस रटंत विद्या को अधिकतर लोग गलत बताते हैं, उसी ने इस बच्चे को उसके घर तक आसानी से पहुंचा दिया था. इस उदाहरण के जरिये मैं यह कतई नहीं साबित करना चाहता कि किसी चीज को रटना अच्छी बात है, लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहता हूं कि कुछ चीजें रटी जानी जरूरी होती हैं. मनुष्य को जो दिमाग मिला है, उसका इस्तेमाल परिस्थितियों के अनुसार करना जरूरी है.
हर जगह केवल चीजों का समझना या केवल रटना काम नहीं आता. हो सकता है कि कुछ ऐसी चीजें हो, जो हमारी समझ में नहीं आ रही हों और इसके लिए समय भी कम हो, ऐसे में उस चीज को रट जाना ही एक अच्छा विकल्प हो सकता है. बाद में समय रहने पर उसे समझा जा सकता है, लेकिन उस वजह से एग्जाम तो खराब नहीं जायेगा. या फिर इंटरव्यू तो नहीं बिगड़ेगा. बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, लेकिन किसी चीज को पूरी तरह से नकारात्मक तरीके से पेश करके नहीं. उन पर कोई चीज थोपने की बजाय, उन्हें यदि इस चीज की आजादी दी जाये कि वे परिस्थिति को समङों और उसके अनुसार निर्णय करें, तो वे ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर पायेंगे. हां उन्हें प्यार से यह समझा सकते हैं कि जहां जरूरत हो, बड़ों से पूछें. इससे बच्चे मां-बाप की हर बात मानेंगे.
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