‘आप’ की समस्याएं और संभावनाएं

आम आदमी पार्टी (आप) के विस्तार के क्र म में यह ध्यान रखना होगा कि इसमें कोई खास व्यक्ति नहीं जुड़ना चाहिए. क्योंकि आम आदमी के संघर्ष की इस मुहिम में यदि खास आदमी की महत्वाकांक्षा और स्वार्थ के जहर को घोला जायेगा, तो इस आंदोलन की हवा तुरंत निकल जायेगी. आम आदमी ने अगर […]
आम आदमी पार्टी (आप) के विस्तार के क्र म में यह ध्यान रखना होगा कि इसमें कोई खास व्यक्ति नहीं जुड़ना चाहिए. क्योंकि आम आदमी के संघर्ष की इस मुहिम में यदि खास आदमी की महत्वाकांक्षा और स्वार्थ के जहर को घोला जायेगा, तो इस आंदोलन की हवा तुरंत निकल जायेगी.
आम आदमी ने अगर अपनी ताकत पहचान ली है, तो उसको रास्ता दिखाने के लिए किसी खास व्यक्ति पर निर्भर रहने कि कतई जरूरत नहीं है. आम आदमी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में ही पार्टी का क्षेत्रीय विस्तार होना चाहिए, वरना इस पार्टी में ऐरे–गैरे राजनीतिक कचरे का जमावड़ा हो जायेगा, जिसको हटा पाना आम आदमी से संभव नहीं हो पायेगा.इस आंदोलन को सर्वव्यापक और सर्वमान्य करने की जरूरत है, तभी अखिल भारतीय स्तर पर आम आदमी की ताकत को पहचान मिलेगी.
डॉ कृष्ण मुरारी सिंह, मैथन, धनबाद
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