‘आप’ की शर्तो के मायने

भाजपा एवं कांग्रेस पार्टी के समक्ष रखी गयीं ‘आप’ की शर्ते कोई अतिशयोक्ति या पागलपन नहीं, बल्कि वर्षो से चली आ रही उस विकृत मानसिकता पर कुठाराघात है जो राजनीति को शोहरत और अकूत संपत्ति अजिर्त करने का एकमात्र एवं शॉर्टकट जरिया समझती है. इन शर्तो को व्यावहारिक एवं जमीनी तौर पर अमलीजामा पहनाने से, […]
भाजपा एवं कांग्रेस पार्टी के समक्ष रखी गयीं ‘आप’ की शर्ते कोई अतिशयोक्ति या पागलपन नहीं, बल्कि वर्षो से चली आ रही उस विकृत मानसिकता पर कुठाराघात है जो राजनीति को शोहरत और अकूत संपत्ति अजिर्त करने का एकमात्र एवं शॉर्टकट जरिया समझती है.
इन शर्तो को व्यावहारिक एवं जमीनी तौर पर अमलीजामा पहनाने से, उस राम–राज्य एवं आदर्श लोकतंत्र के सपनों को मूर्त रूप मिलेगा जिसमें जनप्रतिनिधि मदमस्त राजा की तरह नहीं, बल्कि कर्मठ, ईमानदार और कृतसंकल्प जनसेवक की तरह जन समस्याओं का निवारण करता है. इससे नेताओं के तामझाम के नाम पर फिजूलखर्ची कम होगी. घपले–घोटालों की निष्पक्ष जांच सच्चाई को उजागर करेगी, सशक्त लोकपाल बनेगा और विदेशों में जमा कालेधन की वापसी सुनिश्चित होगी.
रवि रंजन, हरमू बाजार, रांची
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