सिर्फ उत्पादन नहीं भंडारण भी जरूरी

बिहार पूरी तरह खेती पर निर्भर है. इसके बावजूद राज्य में भंडारण की स्थिति बहुत ही खराब है.जरूरत से करीब 50 प्रतिशत कम ही गोदाम हैं. यह उस राज्य की स्थिति है, जहां भंडारण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध गोलघर 18 वीं में ही बना था. खाद्य प्रबंधन के महारथी भी भंडारण की इस […]
बिहार पूरी तरह खेती पर निर्भर है. इसके बावजूद राज्य में भंडारण की स्थिति बहुत ही खराब है.जरूरत से करीब 50 प्रतिशत कम ही गोदाम हैं. यह उस राज्य की स्थिति है, जहां भंडारण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध गोलघर 18 वीं में ही बना था.
खाद्य प्रबंधन के महारथी भी भंडारण की इस पुरानी व्यवस्था की दुहाई देते हैं. भंडारण के समुचित इंतजाम नहीं होने के कारण किसान सबसे अधिक परेशान होते हैं. किसानों के लिए अपनी उपज को औने–पौने दाम पर बेचने की लाचारी होती है. राज्य के 187 प्रखंडों में अनाज रखने की कोई व्यवस्था नहीं है. सरकार का दावा है कि इस साल के अंत तक करीब तीन लाख टन क्षमता के गोदाम तैयार हो जायेंगे.
सरकार इस लक्ष्य को पाने के लिए पचास प्रतिशत का अनुदान भी देने की घोषणा कर चुकी है. सरकार का कहना है कि हरेक प्रखंड में पांच सौ टन और हरेक बाजार समिति में पांच हजार टन क्षमता वाले गोदाम की तत्काल आवश्यकता है. फिर भी गोदाम बनाने को लेकर उद्यमी विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं. यह तो अनाज भंडारण की स्थिति है.
फल–सब्जियों के भंडारण की स्थिति तो और भी खराब है. एक सर्वे के मुताबिक राज्य में सब्जियों को रखने का इंतजाम नहीं होने के कारण सब्जी उत्पादकों को लिए बंपर उत्पादन खुशी कम और गम ज्यादा देता है. नालंदा व इसके आसपास के कई इलाकों में सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के सामने कई बार यह स्थिति हो जाती है कि उन्हें टमाटर या अन्य सब्जियां खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ देनी पड़ती हैं. अगर वे ऐसा नहीं करें, तो सब्जियों को मंडी तक ले जाने का खर्च भी उन्हें अपने घर से देना पड़ेगा.
किसानों के सामने कोढ़ में खाज वाली स्थिति यह है कि सब्जियों को अधिक समय तक न तो रखने का इंतजाम है और न ही फूड प्रोसेसिंग उद्योग लगे हैं, जिससे उनकी सब्जियों या फलों का उचित दाम मिल सके. राज्य सरकार की ओर से फूड पार्क बनाने की कई योजनाओं की घोषणाएं तो हुई हैं. इन घोषणाओं के अमल में आने का इंतजार किसान कर रहे हैं.
किसानों को यह मालूम है कि जब तक उन्हें अपने उत्पादों को देर तक रोके रखने की क्षमता नहीं होगी, तब तक उन्हें अच्छी कीमत नहीं मिलने वाली है. सरकार अगर सचमुच किसानों की हितैषी है, तो भंडारण के इंतजाम प्राथमिकता के आधार पर करना होगा.
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