यह है राजनीति का दोहरापन

जब उच्चतम न्यायालय ने राजनीति में अपराधीकरण पर लगाम के लिए एक ऐतिहासिक फैसला दिया, तो देश की जनता में एक उम्मीद जगी कि अब राजनीति साफ–सुथरी होगी. लेकिन, इसका तोड़ निकालने के लिए अध्यादेश लाया गया. जब इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तो कांग्रेस ने किरकिरी से बचने के […]
जब उच्चतम न्यायालय ने राजनीति में अपराधीकरण पर लगाम के लिए एक ऐतिहासिक फैसला दिया, तो देश की जनता में एक उम्मीद जगी कि अब राजनीति साफ–सुथरी होगी. लेकिन, इसका तोड़ निकालने के लिए अध्यादेश लाया गया.
जब इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तो कांग्रेस ने किरकिरी से बचने के लिए अपने युवराज को आगे कर अध्यादेश को बकवास कहलवा कर नुकसान की भरपाई करने की सोची.
युवराज खुद को समझदार और जनता को बेवकूफ समझते हैं, तो समङों. लेकिन अच्छी बात यह है कि आखिरकार यह अध्यादेश वापस ले लिया गया. यह भारतीय राजनीति के लिए शुभ कदम है. पर क्या राष्ट्रपति का श्रेय युवराज को देना ठीक है? आडवाणी जी ने भी ठीक कहा कि अध्यादेश वापसी का श्रेय राष्ट्रपति महोदय को है, न कि युवराज को.
राकेश कुमार सिंह, ई–मेल से
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