देश में भाषा की स्थिति दयनीय

Published at :18 Mar 2015 5:18 AM (IST)
विज्ञापन
देश में भाषा की स्थिति दयनीय

हम एक ओर बच्चों को सुसंस्कृत शिक्षा देने की बात करते हैं और नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की जाती है, लेकिन देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग इस बात को दरकिनार कर देते हैं. खास कर भाषा के मामले में तो किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है. […]

विज्ञापन
हम एक ओर बच्चों को सुसंस्कृत शिक्षा देने की बात करते हैं और नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की जाती है, लेकिन देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग इस बात को दरकिनार कर देते हैं. खास कर भाषा के मामले में तो किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा है.
भाषा किस दिशा में जा रही है, इसका किसी को ख्याल नहीं है. ऐसा ही एक वाकया परीक्षा भवन में देखने को मिला. नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा के हिंदी के प्रश्नपत्र के अपठित गद्यांश में अकबर के पिता के स्थान पर अभद्र शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसका उपयोग आम तौर पर गाली देने के लिए इस्तेमाल करते हैं. इस प्रश्नपत्र में दो बार एक ही शब्द का प्रयोग किया गया, जो सर्वथा निंदनीय है. हमें यह समझ में नहीं आता कि आखिर हमारे देश में भाषा की स्थिति दयनीय क्यों होती जा रही है?
डॉ अनीता शर्मा, ई-मेल से
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola