बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप करें तो लोकतंत्र खतरे में

Supreme Court On Mamata Banerjee Ipac Case West Bengal Election 2026
Supreme Court on Mamata Banerjee IPAC Case: कोलकाता में आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी में बाधा डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए खतरा है.
खास बातें
Supreme Court on Mamata Banerjee IPAC Case: बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन के खिलाफ बेहद कड़ी टिप्पणी की है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी और राज्य के शीर्ष अधिकारियों ने सीएम को आईना दिखाया है.
सिर्फ केंद्र और राज्य का विवाद नहीं : कोर्ट
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारी की पीठ ने दो टूक कहा कि यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री किसी जांच या छानबीन की प्रक्रिया में बीच में आकर बाधा डालता है, तो इससे पूरी व्यवस्था और लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं है. एक असाधारण स्थिति है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है.
क्या है पूरा विवाद?
मामला 8 जनवरी 2026 का है, जब ईडी की टीम कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के परिसरों पर तलाशी लेने पहुंची थी. ईडी का आरोप है कि कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़ी इस धनशोधन जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने छापेमारी की प्रक्रिया में बाधा डाली.
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सुप्रीम कोर्ट की तीखी दलीलें
सुनवाई के दौरान जब राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इसे केंद्र-राज्य विवाद बताया, तो कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि संविधान की मूल संरचना के सिद्धांतों को प्रतिपादित करने वाले केशवानंद भारती जैसे ऐतिहासिक फैसलों में भी शायद ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की गयी होगी कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री जांच के दौरान कार्यालय में प्रवेश कर जाये.
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बंगाल में जजों को बंधक बनाने का मामला
पीठ ने टिप्पणी की कि हम राज्य में मौजूद व्यावहारिक स्थिति और वास्तविकता से अपनी आंखें नहीं मूंद सकते. कोर्ट ने अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में ऐसी स्थितियां देखी गयी हैं, जहां न्यायिक अधिकारियों तक को बंधक बनाया गया.
संविधान के अनुच्छेद 32 पर बहस
मुख्यमंत्री की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका तभी सुनवाई योग्य है, जब मौलिक अधिकारों का उल्लंघन स्पष्ट हो. पीठ ने इस दलील को भी नहीं माना कि मामले को 5 जजों की बड़ी पीठ के पास भेजा जाये. कोर्ट ने कहा कि वह खुद तय करेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं.
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Supreme Court on Mamata Banerjee IPAC Case: सुरक्षा और नागरिकता
सुप्रीम कोर्ट ने उन ईडी अधिकारियों का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में याचिकाएं दायर कर पूछा है कि क्या एजेंसी का हिस्सा होने मात्र से वे भारत के नागरिक नहीं रह गये हैं? क्या उन्हें सुरक्षा का अधिकार नहीं है?
बृहस्पतिवार को भी जारी रहेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आई-पैक पर छापा मारने वाले ईडी अधिकारियों के खिलाफ राज्य पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है. साथ ही, राज्य पुलिस को छापेमारी की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है. मामले की सुनवाई 23 अप्रैल को भी जारी रहेगी, जिसमें ममता बनर्जी, राज्य सरकार और पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को पहले ही नोटिस जारी किये जा चुके हैं.
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By मिथिलेश झा
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