भारत-पाक तनाव पर पार्क में चर्चा

Published at :14 Oct 2014 3:21 AM (IST)
विज्ञापन
भारत-पाक तनाव पर पार्क में चर्चा

पंकज कुमार पाठक प्रभात खबर.कॉम भारत-पाकिस्तान सीमा पर भले ही गोलीबारी रुक -रुक कर होती हो, पर इस विषय को लेकर मेरे दिमाग में लगातार धमाके हो रहे हैं. मैंने बॉस के साथ मीटिंग करके अपने दिमाग में जारी युद्ध को विराम दिया. शांति की खोज में हिमालय की तरफ तो नहीं जा सकता था, […]

विज्ञापन
पंकज कुमार पाठक
प्रभात खबर.कॉम
भारत-पाकिस्तान सीमा पर भले ही गोलीबारी रुक -रुक कर होती हो, पर इस विषय को लेकर मेरे दिमाग में लगातार धमाके हो रहे हैं. मैंने बॉस के साथ मीटिंग करके अपने दिमाग में जारी युद्ध को विराम दिया.
शांति की खोज में हिमालय की तरफ तो नहीं जा सकता था, तो अपने दोस्तों की तरफ बढ़ा. अक्सर मेरी परेशानी में दोस्त ही हिमालय वाली ठंडक का काम करते है. हम सभी शाम के वक्त घूमते-घूमते पार्क में पहुंचे. वहां बेंचों पर जमे हुए कुछ बुजुर्ग राजनीति पर चर्चा में इतने मशगूल थे कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी आवाज पार्क के बाहर तक जाने लगी थी. एक बुजुर्ग ने अपना पावर वाला चश्मा ठीक करते हुए कहा- ‘‘आप पेपर पढ़िए झा जी, नहीं तो पते नई चलेगा कुछो.
मोदिया के चक्कर में बड़ा-बड़ा अफसर हाथ में झाड़ू थाम लिया है.’’ तभी दूसरे बुजुर्ग बोले- ‘‘अरे भाई हमनी सब काहे वोट दिये थे. सफाई करवाये ला? कि उम्मीद था नौकरी देगा, सेफ्टी रहेगा. देखिए, अब पाकिस्तान से गोला फेंका रहा है. आप झा जी को पेपर पढ़े ला कह रहे हैं, आज का पेपर नहीं देखे हेडलाइनवे में देल था कि पाकिस्तान डेरा नहीं रहा है, जोरदार फायरिंग कर रहा है.
मोदी जी का सफाई योजना से पाकिस्तान थोड़ी ना साफ होगा. मोदी जी को चाहिए था कि अपना 56 इंज का सीना का ताकत दिखाते जाके बाडर पर. लेकिन नहीं, फिर चुनाव प्रचार में लगे है..’’ तभी झा जी बीच में बात काटते हुए बोले- ‘‘जवाब दिया जा रहा भई, लेकिन हम तंग आ गये है. एके बार में साफ काहे नई कर देते हैं. अब मोदी जी को आर-पार का लड़ाई करना चाहिए.
पाकिस्तान का बुतरू नेता लोग भी कश्मीर को छीने का बात कर देता है.’’ इस पूरी चर्चा को ध्यान से सुन रहे एक बुजुर्ग, जो काफी देर से चुप थे, बोले- ‘‘अरे भई लड़ाई आसान कहां है. ओहिनी के पास एटम बम है. कहीं फोड़ दिया तो सब तबाह हो जायेगा.’’ झा जी बोले-‘‘हमनी के पास नई है का! हमनी भी फोड़ देंगे.’’ मैं इस पूरी बहस को ध्यान से सुनता रहा.
चर्चा सिर्फ भारत और पाकिस्तान पर नहीं हुई, चीन, जापान, नेपाल, भूटान सभी को चुनचुन कर उघाड़ा गया. मैं देखना चाहता था कि इस चर्चा का अंत कैसे होता है. लेकिन बहस थी कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. दोस्त भी अब घर चलने की जिद करने लगे थे और बहस धीरे धीरे गर्म होती जा रही थी. अब चर्चा विश्व राजनीति से होती हुई आइएस (इस्लामिक स्टेट) पर आ गयी थी. मैं समझ गया कि चर्चा लंबी चलने वाली है.
पत्रकार होने के नाते मैं समझता था कि भारत-पाक मुद्दे पर युद्ध सिर्फ मेरे दिमाग में चल रहा है, लेकिन यहां तो संघर्ष विराम का नाम तक नहीं था. मैं समझ गया था कि इस पार्क में यह चर्चा और दिमागी युद्ध सालों से चला आ रहा था. शाम होते ही युद्ध विराम, फिर दूसरे दिन जंग शुरू.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola