ePaper

एक युद्ध बड़ा सुंदर-सा

Updated at : 20 Jan 2020 7:10 AM (IST)
विज्ञापन
एक युद्ध बड़ा सुंदर-सा

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार pura-ika@gmail.com मध्य-पूर्व के इलाके में तनाव-ईरान इराक में उठापटक. सायरन, जलती-बुझती रोशनियां, मिसाइल, धमाके- ये सब टीवी स्क्रीन पर भले ही उत्तेजक लगते हैं, पर ये हैं तबाहकारी. यह बात मैंने अपने एक टीवी पत्रकार मित्र से कही. पर वह कुछ खुश न हुआ. करीब तीस साल पहले अमेरिकन टीवी चैनल […]

विज्ञापन

आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

pura-ika@gmail.com

मध्य-पूर्व के इलाके में तनाव-ईरान इराक में उठापटक. सायरन, जलती-बुझती रोशनियां, मिसाइल, धमाके- ये सब टीवी स्क्रीन पर भले ही उत्तेजक लगते हैं, पर ये हैं तबाहकारी. यह बात मैंने अपने एक टीवी पत्रकार मित्र से कही. पर वह कुछ खुश न हुआ.

करीब तीस साल पहले अमेरिकन टीवी चैनल सीएनएन तो खाड़ी युद्ध के दौरान परम टाॅप पोजीशन पर पहुंचा था. लोग तबाह हुए होंगे, पर टीवी चैनल तो बन गया. गुजरात भूकंप में लोगों के घर टूटे, लेकिन एक टीवी चैनल बन गया. युद्ध और भूकंप को पब्लिक बहुत मनोयोग से देखती है. बार-बार देखती है, हर मिनट की डिटेल्स चाहिए होती है पब्लिक को.

युद्ध सबके लिए तबाही नहीं लाता. युद्ध सुंदर भी होता है कई के लिए, मुनाफेदायक भी होता है. युद्ध होता है, तो युद्ध की कथाएं टीवी पर बेची जाती हैं. विश्व युद्धों पर आधारित कई हिट फिल्में लगातार धूम मचाये हुए हैं.

विश्व युद्ध अब तक कमा कर दे रहे हैं, दशकों बाद भी. विश्व युद्ध रोजगार योजनाओं के तौर पर काम कर रहे हैं अब तक. युद्ध की तैयारी- हथियार खरीद तो बहुतों को रोजगार दे रही है. एक शोध के मुताबिक मध्य-पूर्व के देशों में हथियारों की खरीद पिछले दस सालों में लगभग दोगुनी हो गयी है. युद्ध और युद्ध की आशंकाओं से बहुतों को रोजगार मिला है, जबकि शांति से बस शांति ही मिलती है.

एक टीवी डिबेट में मैंने एक एक्सपर्ट से पूछा- अब तो अमेरिका तेल के मामले में लगभग आत्मनिर्भर बन गया है. आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि अब तो अमेरिका तेल का निर्यात तक कर रहा है. तब प्रश्न है कि अमेरिका फिर मध्य-पूर्व में कर क्या रहा है?

वह एक्सपर्ट हंसने लगा. उसका आशय था कि तुम क्या समझते हो कि मध्य-पूर्व में अमेरिका सिर्फ तेल के लिए है? क्या तुम यह समझते हो कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था में तेल की केंद्रीय भूमिका है? हथियार उस इलाके में ज्यादा बिकेंगे, जहां मारधाड़ और तनाव होगा. शांति तो बेरोजगारी लाती है हथियार उद्योग के लिए और बोरियत लाती है टीवी चैनलों के लिए.

मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो हथियार कंपनियों के शेयरों के भाव उछल जाते हैं. अमेरिका और ब्रिटेन की हथियार बनानेवाली बड़ी कंपनियाें के शेयरों के भाव तनाव के साथ ही तेजी से बढ़ जाते हैं.

तनाव सबको तनाव नहीं देता, बहुतों को रोजगार भी देता है. और बड़ी बात यह है कि यह दौलत भी देता है. मुझे तो डर लगता है कि हथियार कंपनियों के बड़े निवेशक ऊपर वाले से शिकायत ना करते हों कि बहुत दिन हुए युद्ध ना हुआ कहीं. हमारी कंपनियों के शेयर उछल ना रहे हैं जी. निवेशक मांग सकते हैं- सुंदर-सा एक युद्ध होना चाहिए.

यानी युद्ध से परेशान न होना हो, युद्ध से मजे लेने हों, तो बंदे का या तो टीवी पत्रकार हो लेना चाहिए या फिर किसी हथियार कंपनी में नौकरी तलाश लेनी चाहिए.युद्ध परेशान नहीं करता, युद्ध तबाही नहीं लाता. हां, बस आपको सही ठिकाने पर होना चाहिए.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola