ePaper

पुराने किले का जालिम सिंह

Updated at : 16 Dec 2019 6:40 AM (IST)
विज्ञापन
पुराने किले का जालिम सिंह

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com टीवी न्यूज चैनल पर खबर थी- पवन जल्लाद आनेवाला है तिहाड़ जेल में फांसी के लिए. टीवी के एक वरिष्ठ मित्र ने आपत्ति की है- बताइए, जल्लाद का नाम कुछ ऐसा होना चाहिए, जोरावर सिंह जल्लाद आनेवाला है या जुझार सिंह, प्रचंड सिंह जल्लाद आनेवाला है. जल्लाद का नाम पवन […]

विज्ञापन

आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

टीवी न्यूज चैनल पर खबर थी- पवन जल्लाद आनेवाला है तिहाड़ जेल में फांसी के लिए. टीवी के एक वरिष्ठ मित्र ने आपत्ति की है- बताइए, जल्लाद का नाम कुछ ऐसा होना चाहिए, जोरावर सिंह जल्लाद आनेवाला है या जुझार सिंह, प्रचंड सिंह जल्लाद आनेवाला है. जल्लाद का नाम पवन या प्रदीप जैसा हो, तो टीवी में खबर ना बनती.

न्यूज दो तरह की होती है. एक होती है न्यूज और दूसरी होती है टीवी न्यूज. टीवी न्यूज ड्रामा मांगती है, अनुप्रास अलंकार मांगती है. जुझार सिंह जल्दी पहुंच कर जल्दी देगा फांसी- इस शीर्षक में कुछ अनुप्रास अलंकार बनता है. अगर ड्रामा न हो, तो टीवी में खबर न बनती.

कुछ चैनलवाले कुछ जल्लादों को पकड़ लाये हैं- जो रस्सी से कुछ कारगुजारी करते दिख रहे हैं. रिपोर्टर बता रहा है कि ऐसे बनती है रस्सी, जो फांसी के काम में आयेगी.

जब कई चैनल कई जल्लादों को स्टार बना चुके थे, तो बाकी चैनलों को होश आया कि जल्लाद तो सारे ही पकड़े जा चुके हैं चैनलों द्वारा. मैंने निहायत बेवकूफाना सुझाव दिया- तो नये बच्चों को पकड़ लो और बता दो कि ये प्रशिक्षु जल्लाद हैं, इंटर्न जल्लाद है, भविष्य के जल्लाद हैं. एक मासूम रिपोर्टर ने पूछा- ये बच्चे बड़े होकर जल्लाद ना बनें, तो क्या हम झूठे न बनेंगे?

सब हंसने लगे. झूठे दिखेंगे, झूठे दिखेंगे- इस टाइप की चिंताएं अगर टीवी पत्रकार करने लगें, तो फिर हो गया काम. पवन जल्लाद का नाम बदल कर चैनल कर सकते हैं- जुझार सिंह जल्लाद या प्रचंड प्रताप जल्लाद. टीवी न्यूज की पहली जरूरत है कि उसे टीवी के हिसाब से फिट होना चाहिए. टीवी न्यूज में भले ही न्यूज बचे या ना बचे, ड्रामा जरूर बचना चाहिए.

जालिम सिंह जल्लाद कैसा नाम रहेगा- इसमें अनुप्रास अलंकार भी है- एक नया रिपोर्टर पूछ रहा है. टीवी चैनल के चीफ ने घोषित किया है- इस जालिम सिंह वाले रिपोर्टर में टीवी की समझ है. प्रदीप जल्लाद को जो जालिम सिंह जल्लाद बना दे, वही जानकार है.

न्यूज जानना टीवी न्यूज की शर्त नहीं है. नाग से कटवा कर भी मारा जा सकता है किसी मुजरिम को- इस पर टीवी डिबेट चल रही है. हास्य कवि अब गंभीर विमर्शों में रखे जाते हैं, लाइट टच बना रहता है. हास्य कवि बता रहा है- फांसी की सजा पाये बंदे को प्याज के भाव पूछने भेज सकते हैं. वह भाव सुनकर ही मर जायेगा. प्याज का भाव संवेदनशील विषय है, फांसी की सजा संवेदनशील विषय है. पर न्यूज चैनल पर सब ड्रामा होता है.

जालिम सिंह जल्लाद आ रहा है- इतनेभर से ड्रामा नहीं बनता है. यूं हेडिंग लगाओ- काली पहाड़ी के पुराने किले से जालिम सिंह जल्लाद आ रहा है- एक चैनल चीफ ने सुझाव दिया है. मैंने कहा कि यूं लगाओ ना- हजार साल पुराने किले से पांच सौ साल का जल्लाद आ रहा है. नये रिपोर्टर ने पूछा- पर हम झूठे नहीं दिखेंगे क्या? उस टीवी चैनल के चीफ ने ज्ञान दिया है- टीवी न्यूज में हम अगर सच-झूठ की इतनी फिक्र करने लगें, तो फिर हम बेरोजगार हो जायेंगे भाई.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola