दुखद है शिक्षा का निजीकरण
Updated at : 06 Dec 2019 6:51 AM (IST)
विज्ञापन

आज भारत में प्राथमिक, मिडिल और उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति पर मातम मनाया जा सकता है. देशभर में फैले प्राथमिक पाठशालाओं, हाई स्कूलों, इंटरमीडिएट कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की घोर कमी है. जबकि उच्च शिक्षाप्राप्त डिग्रीधारी, काबिल युवा बेरोजगार हैं. पैसे के अभाव का बहाना बनाकर प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को निजी […]
विज्ञापन
आज भारत में प्राथमिक, मिडिल और उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति पर मातम मनाया जा सकता है. देशभर में फैले प्राथमिक पाठशालाओं, हाई स्कूलों, इंटरमीडिएट कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की घोर कमी है.
जबकि उच्च शिक्षाप्राप्त डिग्रीधारी, काबिल युवा बेरोजगार हैं. पैसे के अभाव का बहाना बनाकर प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को निजी हाथों में बेचा जा रहा है. फीस बेतहाशा बढ़ायी जा रही है, ताकि आम आदमी अपने बच्चों को पढ़ा ही न सके. शिक्षा का निजीकरण बेहद दुखद है.
निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




