घातक है अमेरिका का यू-टर्न

एक सरकार नीतियां बनाती है. उन पर अमल होता है. जब दूसरी सरकार आती है, तो कुछ नीतियों में परिवर्तन कर देती है. मगर वह एकदम से यू-टर्न नहीं लेती. लेकिन, अमेरिका में ऐसा हो रहा है. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किया था. उसे ट्रंप […]
एक सरकार नीतियां बनाती है. उन पर अमल होता है. जब दूसरी सरकार आती है, तो कुछ नीतियों में परिवर्तन कर देती है. मगर वह एकदम से यू-टर्न नहीं लेती.
लेकिन, अमेरिका में ऐसा हो रहा है. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किया था. उसे ट्रंप ने आते ही उलट दिया. बड़े-बड़े ग्लेशियर बढ़ते तापमान से पिघल रहे हैं. मगर ट्रंप साहब मौसम विज्ञान को मानते ही नहीं.
साल 2017 से विरोध शुरू करते हुए वह अब इस समझौते से औपचारिक रूप से बाहर हो गये हैं. यानी धरती के तापमान को सीमित रखने के लिए जितना धन की आवश्यकता थी, वह अब नहीं मिलेगा. अब आहिस्ता-आहिस्ता धरती से समस्त जीवों का लुप्त होना तय है. दुआ करें कि अगला चुनाव ट्रंप न जीतें. इसी में दुनिया की भलाई है.
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर
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