पाकिस्तान को सबक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Oct 2019 7:12 AM
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नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना की कार्रवाई ने जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकियों की घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी कोशिशों को बड़ा झटका दिया है. जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति और प्रशासनिक संरचना में बदलाव के बाद से पाकिस्तान की ओर से युद्ध-विराम के उल्लंघन की घटनाओं में तेजी आयी है. कश्मीर को अस्थिर करने और […]
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नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना की कार्रवाई ने जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकियों की घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी कोशिशों को बड़ा झटका दिया है. जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति और प्रशासनिक संरचना में बदलाव के बाद से पाकिस्तान की ओर से युद्ध-विराम के उल्लंघन की घटनाओं में तेजी आयी है. कश्मीर को अस्थिर करने और आतंकवाद बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित आतंकियों की घुसपैठ कराने की मंशा की भनक सुरक्षा बलों को पहले ही लग चुकी थी.
कुछ दिन पहले सेना की ओर से बताया गया था कि करीब पांच सौ आतंकी नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में मौजूद हैं तथा कश्मीर में घुसने के लिए मौके का इंतजार कर रहे हैं. इनके अलावा दो-तीन सौ आतंकी घाटी में सक्रिय हैं. पाकिस्तानी सेना अरसे से भारतीय सुरक्षा बलों और बस्तियों पर गोलाबारी की आड़ में आतंकियों की घुसपैठ कराती रही है. इसके लिए नियंत्रण रेखा के नजदीक अस्थायी ठिकाने भी बनाये गये हैं. पाकिस्तानी गोलाबारी के जवाब में भारतीय सेना ने 19 और 20 अक्तूबर की रात ऐसे ही ठिकानों को निशाना बनाया है.
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के मुताबिक, हमले में चार ठिकानों को तबाह करने के साथ पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकियों को ढेर किया गया है. माना जा रहा है कि कार्रवाई में हताहतों की संख्या अभी तक मिली जानकारी से अधिक हो सकती है. सितंबर में ही भारत ने पाकिस्तान को शिकायत की थी कि दो हजार से ज्यादा बार हुए युद्ध-विराम के उल्लंघन में 21 भारतीय मारे गये हैं.
इसके बाद भी पाकिस्तान के रवैये में सुधार का कोई संकेत नहीं है. इसी का नतीजा है कि अब भारत की ओर से कठोर कार्रवाई करने की जरूरत पड़ी है. यह अजीब बात है कि तीन दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद रोकने के लिए बने टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को चार महीने की मोहलत दी है कि वह आतंकी गतिविधियों के लिए धन व अन्य संसाधनों की आपूर्ति पर लगाम लगाये, अन्यथा उसके ऊपर पाबंदी लगानी पड़ेगी. कश्मीर मसले पर भी वह एकदम अलग-थलग पड़ा हुआ है.
अफगानिस्तान भी पाक सेना पर अस्थिरता बढ़ाने और आतंकी गिरोहों को शह देने का आरोप लगाता रहा है. बड़ी संख्या में पाक-स्थित गिरोह और उनके सरगना संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में हैं. हालिया अमेरिका दौरे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान खुद स्वीकार कर चुके हैं कि अब भी हजारों दहशतगर्द पाकिस्तान में हैं.
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तानी सरकार और सेना पाक-अधिकृत कश्मीर, बल्तिस्तान, बलोचिस्तान आदि में आम लोगों पर कहर ढा रही हैं, उनके संसाधनों को लूट रही हैं तथा नागरिकों को आतंकियों व चरमपंथियों की दया पर छोड़ रही हैं. उन्हें पड़ोसी देशों को अशांत करने का इरादा छोड़ देना चाहिए तथा अमन-चैन की बहाली में सहयोग देना चाहिए. पाकिस्तान को समझ लेना चाहिए कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए मन बना चुका है.
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