हर तरफ हनी-ट्रैपिंग!

Updated at : 16 Oct 2019 1:10 AM (IST)
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हर तरफ हनी-ट्रैपिंग!

पीयूष पांडे व्यंग्यकार pandeypiyush07@gmail.com कोई बंदा हनीट्रैप हो जाये, तो एक बात है, लेकिन बंदों का सीडी कांड भी हो जाये तो क्या कहने. सीडी कांड की व्याख्या किसी ग्रंथ में नहीं है. सामान्य परिभाषा के अनुसार, ये ऐसा कांड होता है, जिसमें सीडी बनते वक्त फिल्म का नायक फिल्म रिलीज होते ही खलनायक में […]

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पीयूष पांडे
व्यंग्यकार
pandeypiyush07@gmail.com
कोई बंदा हनीट्रैप हो जाये, तो एक बात है, लेकिन बंदों का सीडी कांड भी हो जाये तो क्या कहने. सीडी कांड की व्याख्या किसी ग्रंथ में नहीं है. सामान्य परिभाषा के अनुसार, ये ऐसा कांड होता है, जिसमें सीडी बनते वक्त फिल्म का नायक फिल्म रिलीज होते ही खलनायक में तब्दील हो जाता है. इस कांड के पश्चात कुर्सी, नौकरी और पत्नी बचाने के लाले पड़ जाते हैं. प्रतिष्ठा के विषय में कुछ सही-सही नहीं कहा जा सकता कि वह कम होती है या बढ़ती है.
फिर भी, आम मान्यता है कि सीडी कांड का नायक बनना खतरों के खिलाड़ी होना है. ऐसे में ज्योतिषियों को पता करना चाहिए कि सीडी कांड बंदे की कुंडली में किस दशा में फलीभूत होता है, ताकि सीडी कांड से बचने के लिए उपाय खोजे जा सकें. उपाय पता चल जायें, तो 90 फीसदी नेता-अधिकारी उपाय करा लेंगे. आखिर ‘प्रीवेंशन इज बैटर दैन क्योर’.
सिर्फ हनीट्रैप में फंसा बंदा माल ले-देकर मामला सैटल कर सकता है, लेकिन सीडी कांड होने के बाद मामला सैटल नहीं, वायरल होता है. और सोशल मीडिया का वायरल वीडियो वायरल बुखार से एक लाख गुना तेजी से फैलता है.
सीडी कांड का नायक रातों-रात मीडिया में एक ऐसा मुकाम हासिल करता है, जो दस-बीस छोटे-मोटे घोटालों से भी हासिल नहीं हो सकता. इन सीडी कांड की बदौलत ही शायद सीडी बनानेवाली कंपनियां भी चल रही हैं. वरना अमेजॉन, नेटफ्लिक्स जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म, यूट्यूब और तमाम दूसरे मोबाइल एप के जमाने में घरों से सीडी उसी तरह गायब हो चुकी हैं, जैसे भारतीय राजनीति से बड़े-बड़े दिग्गज मार्गदर्शक मंडल में पहुंचकर भी नजर नहीं आ रहे हैं.
अनुभवी बताते हैं- ‘त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य हनी-ट्रैपिंगम्, देवो न जानति कुतो मनुष्य:’, यानी त्रिया का चरित्र और पुरुष की हनी-ट्रैपिंग के विषय में ईश्वर भी ठीक-ठीक नहीं बता सकते. हनीट्रैप में बंदा कहीं भी कभी भी फंस सकता है. शराबी शराब पीने के लिए बार (मुधशाला) में जाते हैं, लेकिन इंदौर में मधुशालाओं में गन्ने का रस मिलता है. यह भी एक तरह की हनी-ट्रैपिंग है. नेता वोटरों की हनी-ट्रैपिंग करते हैं.
लुभावने वादे हनी ही तो हैं. नेताओं की हनी-ट्रैपिंग इतनी घातक होती है कि लोग बरसों तक फंसे रहते हैं. कंपनियां ग्राहकों के साथ हनी-ट्रैपिंग करती हैं. चार दिन में गोरा बनाने की क्रीम से लेकर छह महीने में 36 किलो वजन घटानेवाले कैप्सूल ग्राहकों को हनीट्रैप ही तो करते हैं. हनी-ट्रैपिंग का खेल है शिकार फंसाना.
हनी-ट्रैपिंग गंदा है पर धंधा है. क्रेडिट कार्ड कंपनियों से लेकर स्कूल तक सब अपने-अपने शिकार को हनीट्रैप कर रहे हैं. विज्ञापनों की चमक और घाघ मार्केटिंग एक्सपर्ट आपको घर में घुसकर हनीट्रैप करेंगे और आप कुछ नहीं कर पायेंगे. कलियुग की हर महाभारत के मूल में ‘हनी’ है. जहां हनी है, वहां लार टपकाते लोग ट्रैप तो होंगे ही. हनीट्रैंपिंग का धंधा मंदा नहीं पड़ता है. आज हर तरफ हनी-ट्रैपिंग हो रही है, लेकिन हम आंख खोलकर भी धृतराष्ट्र बने हुए हैं.
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