शिक्षण के दौरान नवाचार का प्रयोग करें शिक्षक
Updated at : 03 Sep 2019 7:43 AM (IST)
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शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें अधिगमकर्ता के व्यवहार में उत्तरोत्तर परिवर्तन आता है. आज देश के विभिन्न हिस्सों में देखा जाता है कि हमारे शिक्षक छात्रों को शिक्षण के दौरान उनकी जिज्ञासा को संपूर्ण तरीके से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं. इससे विषय वस्तु की पूर्ण जानकारी छात्रों को नहीं हो पाती है. ऐसे […]
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शिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें अधिगमकर्ता के व्यवहार में उत्तरोत्तर परिवर्तन आता है. आज देश के विभिन्न हिस्सों में देखा जाता है कि हमारे शिक्षक छात्रों को शिक्षण के दौरान उनकी जिज्ञासा को संपूर्ण तरीके से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं. इससे विषय वस्तु की पूर्ण जानकारी छात्रों को नहीं हो पाती है. ऐसे में एक कुशल शिक्षक को अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखे गये नवाचार को प्रयोग में लाना चाहिए.
इस व्यवस्था में शिक्षक नयी और रोचक तरीके से छात्रों को ही केंद्र में रखकर उसे शिक्षा प्रदान करेंगे, तो छात्र अधिगम के उच्चतम स्तर पहुंच सकेंगे. वर्तमान में यथासंभव नवाचार जैसे सेमिनार, टोली शिक्षण, वाद-विवाद, भ्रमण, खेल, कहानी, नाटक, परियोजना आदि कक्षा कक्ष में बेहतर नवाचार हो सकते हैं, जो वर्तमान बाल केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने में अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है.
सौरभ भारद्वाज, रोसड़ा (समस्तीपुर)
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