थर्ड जेंडर को समाज में नहीं मिल रहा समान हक
Updated at : 23 Jul 2019 7:37 AM (IST)
विज्ञापन

हमारा समाज पुरुषवादी समाज है, जो लिंग के आधार पर दो वर्गों को स्वीकार किया है, जिसमें स्त्री और पुरुष हैं. लेकिन, कुछ ऐसे भी मानवीय प्राणी हैं, जिन्हें हम न तो स्त्री वर्ग में शामिल कर सकते हैं और न ही पुरुष वर्ग में. इस तरह के लोगों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष […]
विज्ञापन
हमारा समाज पुरुषवादी समाज है, जो लिंग के आधार पर दो वर्गों को स्वीकार किया है, जिसमें स्त्री और पुरुष हैं. लेकिन, कुछ ऐसे भी मानवीय प्राणी हैं, जिन्हें हम न तो स्त्री वर्ग में शामिल कर सकते हैं और न ही पुरुष वर्ग में.
इस तरह के लोगों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2014 में संवैधानिक मान्यता के तहत थर्ड जेंडर की सूची में रखा. उसे अब भी हमारा समाज सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पाया है. इस द्विलिंगी समाज में दो लिंगों के अलावा भी अन्य लैंगिक पहचान और व्यवहार रखने वाले लोग हैं, जिसे हमारा समाज सहज भाव से स्वीकार नहीं कर पाते हैं. थर्ड जेंडर का वैज्ञानिक पड़ताल भी बताता है कि ऐसे लोग क्रोमोजोम की गड़बड़ी से जन्म लेते हैं, पर व्यवहार में स्त्री और पुरुष जैसे ही होते हैं.
नितेश कुमार सिन्हा, मोतिहारी
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




