न्यायिक प्रक्रिया में हो बदलाव

न्याय में देरी से भारतीय समाज कानून के शासन के प्रति वैसा प्रतिबद्ध नहीं दिखता, जैसा उसे दिखना चाहिए. केवल इतना ही नहीं, न्याय में देरी की समस्या समाज को अनुशासित बनाने में भी बाधक बन रही है. बेहतर होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और साथ ही विधायिका यह महसूस करें कि न्यायिक तंत्र की मौजूदा […]
न्याय में देरी से भारतीय समाज कानून के शासन के प्रति वैसा प्रतिबद्ध नहीं दिखता, जैसा उसे दिखना चाहिए. केवल इतना ही नहीं, न्याय में देरी की समस्या समाज को अनुशासित बनाने में भी बाधक बन रही है. बेहतर होगा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और साथ ही विधायिका यह महसूस करें कि न्यायिक तंत्र की मौजूदा स्थिति देश के अपेक्षित विकास में रोड़े अटकाने का काम कर रही है. आज चाहे आम लोग हों या खास, वे इस पर भरोसा नहीं कर पाते कि अदालतों से उन्हें समय पर न्याय मिलेगा.
कभी-कभी तो एक पीढ़ी बीत जाती है, लेकिन न्याय नहीं मिल पाता है. भरोसे की यह कमी न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और गरिमा पर एक सवाल ही खड़ा कर रही है. इसलिए यह जरूरी हो गया है कि न्यायिक व्यवस्था में उचित बदलाव किया जाए, जिससे हर किसी को त्वरित न्याय प्राप्त हो सके.
डाॅ हेमंत कुमार, भागलपुर
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