राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा

किसी घटना पर रोष जताने के लिए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की परिपाटी चिंताजनक होती जा रही है. शनिवार रात को उत्तर प्रदेश में वाराणसी से दिल्ली आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर नाराज भीड़ ने पत्थरबाजी कर चालक केबिन और छह डिब्बों के शीशों को क्षतिग्रस्त कर दिया. प्रदर्शनों और हड़ताल के दौरान […]
किसी घटना पर रोष जताने के लिए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की परिपाटी चिंताजनक होती जा रही है. शनिवार रात को उत्तर प्रदेश में वाराणसी से दिल्ली आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस पर नाराज भीड़ ने पत्थरबाजी कर चालक केबिन और छह डिब्बों के शीशों को क्षतिग्रस्त कर दिया. प्रदर्शनों और हड़ताल के दौरान सरकारी बसों, दफ्तरों और अन्य चीजों को आगजनी और तोड़-फोड़ का निशाना बनाना रोजमर्रा की बात हो गयी है.
बीते दिनों अरुणाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा में उप मुख्यमंत्री के घर को आग लगा दी गयी और मुख्यमंंत्री के आवास पर हमला करने की कोशिश की गयी. इसी माह केरल उच्च न्यायालय ने एक राजनीतिक संगठन को बंद के दौरान हुई क्षति की भरपाई करने का आदेश दिया है. ऐसी अनेक घटनाएं हैं. साल 2007 में सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक संपत्ति को बचाने के 1984 के कानून में जरूरी बदलाव करने के इरादे से एक समिति का गठन किया था. इसकी सिफारिशों को 2015 के संशोधन विधेयक में गृह मंत्रालय ने जोड़ा भी था.
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