बीमार लोगों की बढ़ती संख्या के प्रति सचेत होने की जरूरत

विविधताओं से भरा भारत बीमारियों का भारत बनता जा रहा है. कभी हमारे देश की शान और पहचान भिन्न-भिन्न रंग, रूप, भाषा, संस्कृति हुआ करती थी. विभिन्न अवसरों पर विविध संस्कृति के दर्शन के रूप में लघु भारत नजर आता था. वहीं, आज देश के बड़े-बड़े अस्पतालों में भिन्न-भिन्न प्रांतों के तरह-तरह के रोगियों से […]
विविधताओं से भरा भारत बीमारियों का भारत बनता जा रहा है. कभी हमारे देश की शान और पहचान भिन्न-भिन्न रंग, रूप, भाषा, संस्कृति हुआ करती थी. विभिन्न अवसरों पर विविध संस्कृति के दर्शन के रूप में लघु भारत नजर आता था. वहीं, आज देश के बड़े-बड़े अस्पतालों में भिन्न-भिन्न प्रांतों के तरह-तरह के रोगियों से भरे रहते हैं और ऐसा लगता है मानो लघु भारत बीमारियों से ग्रस्त होकर खोखला हो गया है. स्वस्थ भारत संक्रमित भारत बन गया है. इतने अधिक संख्याओं में विशेष अस्पतालों में मरीज नजर आते हैं कि लगता है हर घर बीमार है.
ऐसी स्थिति तब दिखती है जब रोग अधिक बढ़ जाने पर लोग अस्पताल की रुख करते हैं. सरकार के साथ व्यक्ति विशेष को भी जागने की जरूरत है, ताकि लोग स्वस्थ रहें न कि स्वास्थ्य से संघर्ष की स्थिति ही नियति बन जाये.
मिथिलेश कुमार, बलुआचक (भागलपुर)
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