ePaper

महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत

Updated at : 11 Jan 2019 8:13 AM (IST)
विज्ञापन
महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत

हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. कालांतर से इस समाज द्वारा महिलाएं शोषित होती रही हैं. समय-समय पर सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए कई प्रकार की योजनाओं का शुभारंभ किया गया, लेकिन सिर्फ योजनाओं को लागू कर देने से महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता. एक तरफ […]

विज्ञापन
हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. कालांतर से इस समाज द्वारा महिलाएं शोषित होती रही हैं. समय-समय पर सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए कई प्रकार की योजनाओं का शुभारंभ किया गया, लेकिन सिर्फ योजनाओं को लागू कर देने से महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल सकता. एक तरफ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला साक्षरता व कन्या भ्रूणहत्या के प्रति लोगों को जागरूक िकया जा रहा है, वहीं समाज में कुछ इस तरह के लोग भी हैं जो मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी करने से बाज नहीं आते हैं.
क्या महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना हर नागरिक का फर्ज नहीं है? एक बार गौर से सोच कर देखिए हम पुरुषों की जननी एक महिला ही है. ऐसे में अगर महिला ही नहीं रही तो पुरुष का अस्तित्व क्या रह जायेगा. इसलिए सोच बदलिए, ताकि महिलाएं स्वच्छंद, स्वतंत्र और उन्मुक्त होकर जी सकें.
राहुल सिंह, गोपालगंज
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola