विराट कोहली को बदलना होगा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Dec 2018 6:44 AM
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आशुतोष चतुर्वेदी प्रधान संपादक, प्रभात खबर ashutosh.chaturvedi @prabhatkhabar.in आक्रामक और अहंकारी होने के बीच बहुत बारीक रेखा है. भारतीय कप्तान विराट कोहली इस रेखा को अक्सर पार करते नजर आते हैं. वह विरोधी खिलाड़ियों से उलझते हैं, कई बार विरोधी बल्लेबाज के आउट होने पर उस पर टिप्पणी करते हैं और अंपायर के फैसलों पर […]
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आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक, प्रभात खबर
ashutosh.chaturvedi
@prabhatkhabar.in
आक्रामक और अहंकारी होने के बीच बहुत बारीक रेखा है. भारतीय कप्तान विराट कोहली इस रेखा को अक्सर पार करते नजर आते हैं. वह विरोधी खिलाड़ियों से उलझते हैं, कई बार विरोधी बल्लेबाज के आउट होने पर उस पर टिप्पणी करते हैं और अंपायर के फैसलों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं.
अगर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गये पिछले दो टेस्ट मैचों पर नजर डालें, तो विराट कोहली बेवजह आक्रामक होते दिखायी देते हैं. यह सच्चाई है कि इस वक्त विराट कोहली के स्तर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई बल्लेबाज नहीं है, लेकिन उन्हें समझना होगा कि उनके व्यवहार से उनकी गरिमा को ठेस पहुंच रही है.
हाल में कोहली की बेवजह की आक्रामकता पर जाने माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एक ट्वीट किया था कि भारतीय कप्तान विराट कोहली दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी हैं, लेकिन वह दुनिया के सबसे खराब व्यवहार वाले खिलाड़ी भी हैं.
उनके अहंकार और खराब व्यवहार के कारण उनकी उपलब्धियां कम होती हैं. और अंत में उन्होंने लिखा था कि मेरा भारत छोड़ने का कोई भी इरादा नहीं है. इसके बाद तो खेमे बंट गये और कुछ लोग नसीरुद्दीन शाह के पक्ष में खड़े हो गये, तो कई लोग उनके खिलाफ. नसीरुद्दीन शाह की अंतिम लाइन का रहस्य यह है कि कुछ समय पहले विराट कोहली अपने प्रशंसकों के सवालों का जवाब दे रहे थे., एक शख्स ने कहा कि मौजूदा भारतीय खिलाड़ियों से ज्यादा उसे इंग्लैंड के खिलाड़ी पसंद हैं, तब विराट कोहली ने जवाब दिया- तो उसे भारत छोड़ देना चाहिए. विराट की इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना हुई थी. लोगों की राय थी कि उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था.
आॅस्ट्रेलिया के साथ दूसरे टेस्ट मैच में विराट कोहली और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन के बीच विवाद खासी सुर्खियों में रहा. दोनों के बीच कई बार नोक-झोंक हुई. अंपायरों को मामला शांत कराना पड़ा. खबर है कि कोहली ने बहस के दौरान टिम पेन से कहा था कि मैं दुनिया का नंबर वन बल्लेबाज हूं और तुम तो सिर्फ कार्यवाहक कप्तान हो. हालांकि बीसीसीआइ ने इन खबरों का खंडन किया है.
ये खबरें भी आयीं कि ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पेन ने मुरली विजय से कहा कि मैं जानता हूं, विराट तुम्हारे कप्तान हैं, लेकिन एक इंसान के तौर पर तुम उन्हें पसंद नहीं करते हो. दूसरे टेस्ट की पहली पारी में विराट कोहली जमकर बल्लेबाजी कर रहे थे. वह शतक जमा चुके थे.
तभी पैट कमिंस की एक गेंद ने उनके बल्ले का बाहरी किनारा लिया और दूसरी स्लिप में ड्राइव लगाकर कैच पकड़ लिया गया, लेकिन कई रीप्ले देखने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि क्या कोहली का कैच साफ तरह से लिया गया है या नहीं? मैदानी अंपायर का इशारा आउट था, तो थर्ड अंपायर ने उसी फैसले को सही ठहराया. कोहली को यह फैसला रास नहीं आया और उन्होंने जमकर गुस्सा जाहिर किया.
जाने माने खिलाड़ी सुनील गावस्कर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं. वह टीम चयन को लेकर कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री की भूमिका पर नाखुश हैं. गावस्कर का कहना है कि अगर भारतीय टीम यह सीरीज नहीं जीतती है, तो कोच और कप्तान पर सवाल उठना लाजमी है.
उनका कहना था कि बॉल टेंपरिंग मामले में दोषी पाये गये डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ की गैर मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया को हराना कोई बड़ी बात नहीं है. भारतीय टीम ने एडिलेड टेस्ट में यह साबित भी किया है. अब पर्थ में मिली हार से सबक लेकर भारतीय टीम को अगले दो टेस्ट मैचों को जीतना होगा. गावस्कर का कहना है कि भारतीय टीम नंबर एक टीम बनकर उभरी है, लेकिन विदेशों में टीम इंडिया की हार किसी से छुपी नहीं है. इसमें चयनकर्ताओं की गलतियों की अनदेखी एक बड़ी भूल होगी. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दौरे से ये गलतियां अब तक लगातार जारी हैं.
गावस्कर ने चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में पाकिस्तान के हाथों मिली हार के लिए भी चयनकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था कि चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में पहले फील्डिंग करने के अलावा दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में खिलाड़ियों के चयन में चयनकर्ताओं ने अपना काम बखूबी नहीं निभाया. कोहली के बारे में गावस्कर ने कहा कि हम कोहली को एक बल्लेबाज और एक कप्तान के रूप में देख चुके हैं. अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज गंवाते हैं, तो हमें टीम में बदलाव को लेकर विचार करना होगा.
भारत की पिछले 12 महीनों में तीन विदेशी दौरों के आंकड़ों में यह बात सामने आयी है कि टेस्ट क्रिकेट में विराट उतनी कुशलता के साथ लक्ष्य का पीछा नहीं कर पाये हैं, जितना कि वह वनडे क्रिकेट में कर पाते हैं.
टीम चयन में तो हर बार लोचा हुआ है. दूसरे टेस्ट में भारतीय टीम में तेज गेंदबाजों को जगह दी गयी, कोई स्पिनर नहीं रखा गया. ऑस्ट्रेलिया से भारत यह टेस्ट 146 रनों से हार गया. कप्तान कोहली ने कहा कि पिच को देखते हुए और टीम में चार गेंदबाजों के रहते उन्होंने रवींद्र जडेजा के चयन पर विचार नहीं किया.
दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने ऑफ स्पिनर नाथन लायन को टीम में स्थान दिया और उन्होंने मैच में कुल आठ विकेट लिये तथा उन्हें मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला. कोहली ने मैच के बाद कहा कि पिच को देखते हुए हमें अपने चार तेज गेंदबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, इसलिए जडेजा के चयन पर विचार ही नहीं किया.
आलोचना के बीच विराट कोहली की उपलब्धियों पर नजर डालना भी जरूरी है. बल्लेबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके टक्कर का कोई बल्लेबाज नहीं है.
वह विपरीत परिस्थितियों में भी शतक लगाने से नहीं चूकते हैं. पर्थ में खेले गये दूसरे टेस्ट में हार के बाद भी भारतीय कप्तान विराट कोहली का बल्ला जमकर बोल रहा है. आइसीसी की ताजा रैंकिंग में विराट कोहली नंबर एक पायदान पर बरकरार है. रैंकिंग में नंबर दो न्यूजीलैंड के बल्लेबाज केन विलियमसन हैं, लेकिन विलियमसन और विराट कोहली की बीच अच्छा-खासा फासला है.
हम सभी सौरभ गांगुली को आक्रामक कप्तान के रूप में याद करते हैं. उन्होंने भारतीय टीम के सोचने का नजरिया बदला, लेकिन वह करियर में कभी इतने विवादित नहीं रहे, जितने विराट कोहली नजर आ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि कोच रवि शास्त्री भी विराट कोहली को नियंत्रित नहीं करते दिखायी दे रहे हैं.
एक बात और कि टीम में ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है, जो उनके फैसलों से असहमत होने की हिम्मत कर सके. सहवाग ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा था कि उन्हें लगता है कि विराट कोहली को एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है, जो मैदान पर उन्हें उनकी गलतियां बता सके.
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