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डॉ सुभाष मुखोपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण आज : यह है प्रतिभा का सच्चा सम्मान

Updated at : 09 Dec 2018 7:45 AM (IST)
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डॉ सुभाष मुखोपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण आज : यह है प्रतिभा का सच्चा सम्मान

अनुज कुमार सिन्हा नौ दिसंबर का दिन झारखंड खास कर हजारीबाग के लिए ऐतिहासिक दिन हाेगा. कारण, हजारीबाग (झारखंड) की धरती पर जन्मे और दुनिया में चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा काम करनेवाले डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की आदमकद प्रतिमा का अनावरण हाेगा. उस डॉ सुभाष का, जिन्हें देश में पहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा काे […]

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अनुज कुमार सिन्हा
नौ दिसंबर का दिन झारखंड खास कर हजारीबाग के लिए ऐतिहासिक दिन हाेगा. कारण, हजारीबाग (झारखंड) की धरती पर जन्मे और दुनिया में चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा काम करनेवाले डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की आदमकद प्रतिमा का अनावरण हाेगा. उस डॉ सुभाष का, जिन्हें देश में पहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा काे जन्म दिलाने का श्रेय हासिल है. लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इस महान वैज्ञानिक-चिकित्सक काे इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्हाेंने 1981 में जान दे दी. उनकी बड़ी दर्दनाक कहानी है.
वर्ष 1978 में डॉ मुखाेपाध्याय ने पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म कराया. लेकिन श्रेय मिलने की बात ताे दूर, उन्हें परेशान किया गया. मजाक उड़ाया गया. माैत के 22 साल बाद 2003 में उनके साथ न्याय हुआ जब उनके शाेध कार्य काे मान्यता मिली आैर यह स्वीकार किया गया कि आइवीएफ प्रणाली से भारत में सबसे पहले उन्हाेंने ही बच्ची का जन्म कराया था. लेकिन इस खुशी काे सुनने के लिए डॉ मुखाेपाध्याय दुनिया में नहीं थे. उनकी माैत के 37 साल बाद हजारीबाग सदर अस्पताल में डॉ सुभाष की प्रतिमा लग रही है.
यह प्रतिभा का सम्मान है. जन्मभूमि हजारीबाग औरकर्मभूमि काेलकाता. इस पूरे कार्यक्रम में चार चांद लगेगा डॉ सुभाष के सहयाेगी डॉ सनीत मुखर्जी औरपहली टेस्ट ट्यूब बेबी दुर्गा(कणुप्रिया) के पिता प्रभात अग्रवाल की उपस्थिति से. दाेनाें काेलकाता से आ चुके हैं.शायद अब भी डॉ सुभाष का यह सम्मान नहीं हाे पाता अगर यह पता नहीं चलता कि उनका संबंध हजारीबाग से रहा है. (गाैर कीजिए माैत 1981 में हुई थी.
35 साल बीत गये हैं लेकिन अभी तक न ताे काेई सम्मान, न काेई प्रतिमा या न काेई मेडिकल कॉलेज उनके नाम?). जैसे ही हाल में यह जानकारी मिली, प्रभात खबर ने रिपाेर्ट छापी, अभियान चलाया. समाज के सभी वर्गाें का सहयाेग मिला. बंगाली एसाेसिएशन (डॉ सजल मुखर्जी, साैभिक भट्टाचार्य आदि) का साथ मिला. इंडियन मेडिकल एसाेसिएशन के साथ वकीलाें, शिक्षकाें, व्यावसायियाें, जनप्रतिनिधियाें ने सामूहिक रूप से अपने इस नायक की याद काे जिंदा रखने के लिए प्रयास किया. जब यह मामला युवा आइएएस अधिकारी औरहजारीबाग के उपायुक्त रविशंकर शुक्ला के पास आया, उन्हाेंने बगैर एक क्षण गंवाये यह वादा किया कि प्रतिमा लगेगी.
उन्हाेंने अपने स्तर से यह कहते हुए सारी व्यवस्थाएं की कि इससे युवाओं काे प्रेरणा मिलेगी. रिजल्ट सामने है. सिर्फ वादा ही नहीं किया, काम भी कर दिखाया. वह भी समयबद्ध. प्रतिमा अनावरण के लिए तैयार है. इसमें जिन लाेगाें ने या जिन संस्थाओं का याेगदान है, वे सभी धन्यवाद के पात्र हैं.
यह नि:स्वार्थ कार्य है. इसका उद्देश्य है-झारखंड की माटी पर जन्मे औरअदभुत प्रतिभा के धनी डॉ सुभाष मुखाेपाध्याय की याद काे जिंदा रखना, चिकित्सा की दुनिया में किये गये शाेध का श्रेय उन्हें दिलाना, इतिहास में उनके साथ जाे गलती की, उसे ठीक कर उनके साथ न्याय करना. यह अनावरण संदेश देगा कि समाज में किसी भी क्षेत्र में किया गया बेहतर काम बेकार नहीं जाता है.
न्याय मिलता है, काम की सराहना हाेती है, भले ही समय लगे. डॉ सुभाष की प्रतिमा लगाना एक पुण्य का काम है. यह एक प्रयास है. बेहतर यही हाेगा कि सरकार डॉ सुभाष के नाम पर हजारीबाग या रांची में बड़ा शाेध संस्थान खड़ा करे ताकि यहां ये युवा उनसे प्रेरणा लेकर आैर बड़ा काम करने में लग जायें. समाज के असली नायक ताे डॉ सुभाष आैर उन जैसे लाेग ही हैं.
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