आजादी का कैशबैक
Updated at : 13 Aug 2018 7:21 AM (IST)
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आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार कैशबैक विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध इस प्रकार है… स्वतंत्रता दिवस पर तरह-तरह के सेल आॅफर चल रहे हैं. एक ने घोषणा की है कि स्वतंत्रता दिवस पर सेल में खरीदारों को 15 परसेंट का कैशबैक दिया जायेगा. 15 अगस्त का संबंध 15 परसेंट से जोड़ […]
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आलोक पुराणिक
वरिष्ठ व्यंग्यकार
कैशबैक विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त निबंध इस प्रकार है…
स्वतंत्रता दिवस पर तरह-तरह के सेल आॅफर चल रहे हैं. एक ने घोषणा की है कि स्वतंत्रता दिवस पर सेल में खरीदारों को 15 परसेंट का कैशबैक दिया जायेगा. 15 अगस्त का संबंध 15 परसेंट से जोड़ दिया गया है.
यहां कैशबैक की परंपराएं बहुत पुरानी हैं. हालांकि, कैशबैक के बारे में लोगों को ज्यादा ज्ञान तब ही हुआ, जब से आॅनलाइन सेल शुरू हुई है. बंदा सौ रुपये का आइटम खरीदता है, 15 परसेंट का कैशबैक मिलता है यानी 15 रुपये बैक होकर उसके खाते में आ जाते हैं. लेकिन, कैशबैक के कतिपय दूसरे स्वरूपों से यह देश बहुत पहले से वाकिफ रहा है.
बंदा किसी चौराहे पर रेडलाइन क्राॅस कर जाये, ट्रेफिक पुलिसवाला उसे पकड़ ले, वह जेब से पांच सौ का नोट कैश निकालकर ट्रैफिक वाले को थमा दे, तो वह मुक्त हो जाता है. वह बैक टू ओरिजनल सिचुएशन आ जाता है, जैसे पुलिस ने उसे पकड़ा ही नहीं था. कैश देकर पुरानी पोजीशन में बैक हो जाने को भी कैशबैक का एक स्वरूप मान सकते हैं. इस तरह के कैशबैक भारत में तरह-तरह के दफ्तरों में पाये जाते हैं.
इनकम टैक्स अफसर डपटता है कि तुमने इतने रुपये की इनकम नहीं दिखायी है, तुम्हारी पकड़ होगी. बंदा कुछ रकम थमा दे, तो वह पुरानी पोजीशन में बैक हो जाता है. यह भी कैशबैक का ही एक उदाहरण है. भारतीय जनमानस ऐसे कैशबैक से बरसों से वाकिफ है. आम जनता को तकलीफ तो तब हो जाती है, जब यह कैशबैक अमान्य कर दिया जाता है और सामान्य जनजीवन बाधित हो जाता है.
जैसे ट्रक में गैरकानूनी सामान को कुछ कैश लेकर आमतौर पर जाने दिया जाता है. एक दिन कानून के पालक अड़ जाएं कि आज तो सब कानून से होगा और ट्रक को जाने नहीं दिया जायेगा. रुके ट्रक की वजह से ट्रैफिक जाम हो जायेगा. पब्लिक जाम में परेशान हो जायेगी. सामान्य जनजीवन बाधित हो जायेगा. कैशबैक से कई प्रक्रियाएं सामान्य तौर पर चलती रहती हैं.
कैशबैक के कई आयाम हैं. भारत के कई नेताओं के परिवार कई पीढ़ियों से, स्वतंत्रता संग्राम में अपने बुजुर्गों के योगदान का कैशबैक ले रहे हैं.
कोई बुजुर्गवार एक बार आजादी के संग्राम में शामिल हो गये, तो फिर उनका परिवार इसका कैशबैक कई तरह से ले रहा है. उस परिवार का कोई बच्चा चुनाव लड़कर मंत्री बन गया, फिर उसका बच्चा भी मंत्री बन गया. पेट्रोल पंप ले लिया, गैस की एजेंसी ले ली, इससे भरपूर कैश कमाया.
ठिकाने के प्लाटों पर भी स्वतंत्रता सेनानियों के बाद की पीढ़ियों ने हाथ साफ किया. एक बुजुर्ग के संघर्ष का कैशबैक कई पीढ़ियां ले रही हैं. भारत में इस तरह का कैशबैक लगभग हर राज्य हर जिले में पाया जाता है. कह सकते हैं कि स्वतंत्रता दिवस की सेल में कैशबैक का आॅफर करनेवाले ये न समझ लें कि वे नया कर रहे हैं. स्वतंत्रता संग्राम से कैशबैक तो न जाने कब से लिया जा रहा है.
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