भारतीय राजनीति में नये युग का सूत्रपात

Published at :17 May 2014 5:20 AM (IST)
विज्ञापन
भारतीय राजनीति में नये युग का सूत्रपात

मोदी के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है. उन्हें जहां जनता की ‘अच्छे दिन’ की उम्मीदों को पूरा करना है, वहीं बहुत से लोगों के मन से उस भय को भी दूर करना है, जो चुनाव प्रचार के दौरान उनकी छवि को लेकर फैलाया गया था. 2014 का जनादेश कई मायनों में ऐतिहासिक है. इससे […]

विज्ञापन

मोदी के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है. उन्हें जहां जनता की ‘अच्छे दिन’ की उम्मीदों को पूरा करना है, वहीं बहुत से लोगों के मन से उस भय को भी दूर करना है, जो चुनाव प्रचार के दौरान उनकी छवि को लेकर फैलाया गया था.

2014 का जनादेश कई मायनों में ऐतिहासिक है. इससे भारतीय राजनीति में एक नये दौर की शुरुआत हो रही है. देश में पिछले तीन दशकों में किसी एक दल या गंठबंधन को इतनी बड़ी चुनावी कामयाबी नहीं मिली थी. इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर पर सवार होकर कांग्रेस ने 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में अपने राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी.

अब तीन दशक बाद सोनिया गांधी व राहुल गांधी के नेतृत्व में उसे ऐतिहासिक पराजय का मुंह देखना पड़ रहा है. लोकसभा में उसके सांसदों की संख्या दो अंकों में रह गयी है. इसमें किसी बहस की गुंजाइश नहीं बची है कि भाजपा और एनडीए की इस बड़ी जीत के नायक नरेंद्र मोदी हैं. बीते वर्ष सितंबर में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद से ही मोदी पूरे देश में लगातार घूम कर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे थे. विगत दो महीने के लंबे चुनाव अभियान में उन्होंने बार-बार कहा कि उनकी पार्टी या गंठबंधन के प्रत्याशी को न देखें, बल्कि उन्हें यानी नरेंद्र मोदी को विजयी बनाएं.

पूरे चुनाव अभियान में भाजपा के वरिष्ठ एवं स्थापित नेताओं की भूमिका बहुत सीमित रही. पार्टी के केंद्रीय और राज्य-स्तरीय प्रचार कमेटियों के प्रभारी भी मोदी के विश्वासपात्र नेता ही थे, जिनमें अधिकतर पार्टी की द्वितीय पंक्ति के नेता माने जाते थे. मोदी के भाषणों के अंदाज और प्रचार की आक्रामक शैली भी इस बात को आधार देते हैं कि यह एक नयी भाजपा की जीत है. हालांकि, इसका यह अर्थ यह कदापि नहीं है कि इस जीत में भाजपा की सांगठनिक क्षमता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और देशभर में पसरे उसके मजबूत नेटवर्क की भूमिका कम रही है. दरअसल, नरेंद्र मोदी ने जिस त्वरा और तेवर के साथ अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की थी, उसका आधार पार्टी और संघ-परिवार ही थे. पार्टी के भीतर और बाहर उभरे संदेह और असंतोष के तमाम स्वर मोदी को मिलते जन-समर्थन से किनारे होते गये. बहरहाल, अब जनादेश सामने हैं और अकेले भाजपा लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े को पार कर चुकी है.

भाजपा और एनडीए को देश के हर राज्य, क्षेत्र, वर्ग और समूह में समर्थन मिला है. जाहिर है कि इस समर्थन की बड़ी वजह वे उम्मीदें हैं, जिन्हें चुनाव-प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी के भाषणों ने आम मतदाताओं में जगायी हैं. लचर अर्थव्यवस्था, रोजगार की कमी, बेलगाम महंगाई, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को लेकर चिंता जैसे कई अहम मुद्दे देश के सामने हैं. भ्रष्टाचार मानो शासन-व्यवस्था का स्थायी चरित्र बन गया है. मोदी ने इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने के साथ जन-जीवन की बेहतरी का भरोसा दिलाया, जिससे उनके पक्ष में अभूतपूर्व लहर का सृजन हुआ. हालांकि कांग्रेस की पराजय का आधार पहले से तैयार हो रहा था. जनता का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं है जो डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार के कामकाज से असंतुष्ट और क्षुब्ध न हो.

किसान अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाने के कारण अवसाद की स्थिति में हैं तथा आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हैं. यही हालत शहरी और ग्रामीण कामगारों की है. स्थायी रोजगार की कमी, कम मजदूरी और बढ़ती महंगाई से वे दयनीय परिस्थितियों में जीने के लिए अभिशप्त हैं. देश में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या है, जिनमें दस करोड़ से अधिक तो सिर्फ इस चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने योग्य हुए हैं. इन युवाओं को आगामी कुछ वर्षो में सम्मानजनक रोजगार के अवसर चाहिए. पिछले कुछ वर्षो में नये रोजगार सृजित करने की दिशा में प्रगति बड़ी निराशाजनक रही है.

ऐसे में मोदी ने विकास के नारे के साथ युवाओं में उम्मीद जगायी. अब युवाओं ही नहीं, सभी मतदाताओं की आकांक्षाओं पर खरा उतरना मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी. हालांकि नरेंद्र मोदी के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है. उन्हें जहां जनता की ‘अच्छे दिन’ की उम्मीदों को पूरा करना है, वहीं बहुत से लोगों के मन से उस भय को भी दूर करना है, जो चुनाव प्रचार के दौरान उनकी छवि को लेकर फैलाया गया था. पूरे देश के नेता के रूप में उन्हें हर तबके और समुदाय का भरोसा जीतना होगा, उनको साथ लेकर चलना होगा. यह ऐतिहासक जनादेश सबके सर्वागीण विकास के लिए ही है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola