कब बदलेगी लोगों की मानसिकता

मेरठ में प्याऊ को लेकर हुई दो गुटों की झड़प ने सांप्रदायिक रूप ले लिया और पूरे शहर को अशांत कर दिया. बड़े आश्चर्य की बात है कि आजादी के इतने वर्षो के बाद भी हम सांप्रदायिक उन्माद पर काबू पाना नहीं सीख पाये हैं. इसके कारण रह-रह कर देश के कई हिस्सों में तनाव […]
मेरठ में प्याऊ को लेकर हुई दो गुटों की झड़प ने सांप्रदायिक रूप ले लिया और पूरे शहर को अशांत कर दिया. बड़े आश्चर्य की बात है कि आजादी के इतने वर्षो के बाद भी हम सांप्रदायिक उन्माद पर काबू पाना नहीं सीख पाये हैं. इसके कारण रह-रह कर देश के कई हिस्सों में तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है, जो हमारे इतिहास को तो दागदार बनाती ही है, वर्तमान को भी विचलित कर देती है और भविष्य को सशंकित बनाती है. ऐसी ही घटना असम, मुजफ्फरनगर में भी देखने को मिली, जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए बेहद शर्मनाक है.
हमारे सद्भाव को कलंकित होने से बचाने के लिए ऐसी घटनाओं को रोकने पर गंभीरता से विचार करना होगा तथा दंगा करने व उसे हवा देने वालों से सख्ती से निबटना होगा. सरकार और समाज प्रयास करे, तो कुछ भी असंभव नहीं. बस मिल-जुल कर सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है.
विवेक माथुर, कांके
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