नमो-नमो करें, अच्छे दिन का मजा लें

Published at :15 May 2014 5:42 AM (IST)
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नमो-नमो करें, अच्छे दिन का मजा लें

।। रजनीश आनंद।। (प्रभात खबर.कॉम) आज सुबह अखबार उठाया, तो देखा कि अच्छे दिन आने वाले हैं. सभी एग्जिट पोल का तो यही दावा है. अब अच्छे दिन आयेंगे कैसे, यह भी सोचने वाली बात है. हो सकता है, हमारे मोदी भाई कोई करिश्माई डंडा लेकर पीएम की कुरसी पर आसीन हों जिसे घुमाते ही […]

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।। रजनीश आनंद।।

(प्रभात खबर.कॉम)

आज सुबह अखबार उठाया, तो देखा कि अच्छे दिन आने वाले हैं. सभी एग्जिट पोल का तो यही दावा है. अब अच्छे दिन आयेंगे कैसे, यह भी सोचने वाली बात है. हो सकता है, हमारे मोदी भाई कोई करिश्माई डंडा लेकर पीएम की कुरसी पर आसीन हों जिसे घुमाते ही देश की सारी समस्याओं का समाधान हो जाये. हमारे जैसे बीपीएल लोगों को, तो बस उम्मीद की किरण दिखनी चाहिए और हम ख्याली पुलाव पकाने लग जाते हैं.

सो, मैं भी अच्छे दिन के ख्वाब देखने लगी. तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, सपना टूटने की खीज लिये मैंने दरवाजा खोला. सामने मेरे परम-मित्र शर्मा जी अपनी धर्मपत्नी के साथ पधारे थे. उनके हाथों में एक पैकेट था. घर के अंदर आते ही उन्होंने पैकेट मुङो थमाया और कहा, ‘‘मोहतरमा ये लीजिए गरमागरम जलेबियां. कुछ कचौरियां भी हैं. सोचा कि आज हम दोनों आपके साथ ही नाश्ता करते हैं.’’ मैंने बिना कोई तकल्लुफ किये पैकेट लिया और सीधे रसोई में चली गयी.

नाश्ता परोसते वक्त मेरे मन में यह सवाल जरूर उठ रहा था कि आखिर क्या बात हो गयी कि आज सुबह-सुबह शर्मा जी जलेबी लेकर आये हैं? सो, मैंने उनसे यह पूछ ही लिया कि आखिर यह गरमागरम जलेबी किसी खुशी में? क्या आज श्रीमतीजी का जन्मदिन है या फिर आप लोगों की शादी की सालगिरह? मेरे सवाल पर शर्मा जी की श्रीमतीजी का चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया. उन्होंने कहा, ‘‘अरे नहीं, अब बुढ़ापे में क्या सालगिरह मनायेंगे! ये तो कल रात से ही बहुत खुश हैं. मुङो तो कल रात को ही मिठाई खिला दी. आज सुबह कहने लगे- अच्छे दिन आने वाले हैं, इसलिए चलो अपनी मित्र का भी मुंह मीठा करा आऊं.’’ पत्नी की बातें सुन शर्मा जी मुस्कुराये.

मैंने पूछा, ‘‘क्यों शर्माजी, आप कब से ‘नमो-नमो’ करने लगे? आप तो ‘हर हाथ शक्ति, हर हाथ तरक्की’ का नारा बुलंद किये हुए थे.’’ इस पर शर्माजी ने ठहाका लगाया, ‘‘अरे मैडम, वो खिलाड़ी लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सकता, जो हवा का रुख न पहचान सके . अबकी मोदी सरकार है, तो नमो-नमो का राग तो छेड़ना ही पड़ेगा. अन्यथा अपनी रोजी-रोटी कैसे चलेगी? रिटायरमेंट के बाद मैं अहम कार्यकर्ता बन गया हूं, जिस पार्टी की सरकार हो उसकी टोपी पहन नो. अपनी रोजी-रोटी चलती रहेगी. हम उन लोगों में हैं जो मौका देख कर चौका लगाते हैं.’’

मैंने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘‘फिर आपके भैयाजी का क्या होगा, इस बार तो बहना ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है.’’ शर्माजी ने मुङो समझाया, ‘‘मैंने उनका साथ थोड़े ही छोड़ा है, बस कुछ दिनों की जुदाई है.जैसे ही सत्ता की चाबी उनके हाथ आयेगी, हमारा साथ फिर हो जायेगा, सो जलेबी खाइए और मस्त रहिए.’’ शर्मा जी की बातें सुन मुङो इस बात का अहसास हो गया कि कुछ लोगों के अच्छे दिन सचमुच आने वाले हैं, जिसकी झलक नेताओं के चेहरे पर साफ दिख रही है..

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