दो किताबें और बहुत सारी मुश्किलें

दो किताबों के प्रकाशन से वर्तमान सरकार या कहें कि कांग्रेस की अंदरूनी कमियां लोगों के सामने खुल रही हैं. सरकार के उच्चतम गलियारों में होने वाली घटनाओं से आम जनता प्राय: अनभिज्ञ होती है. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने सरकार में सोनिया गांधी के दबदबे को जनता के समक्ष रखा है. […]
दो किताबों के प्रकाशन से वर्तमान सरकार या कहें कि कांग्रेस की अंदरूनी कमियां लोगों के सामने खुल रही हैं. सरकार के उच्चतम गलियारों में होने वाली घटनाओं से आम जनता प्राय: अनभिज्ञ होती है. मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने सरकार में सोनिया गांधी के दबदबे को जनता के समक्ष रखा है. बारू जी के दावे को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता.
सोनिया गांधी ने बता दिया कि पद पर नहीं रहते हुए भी किस तरह उसे अपने नियंत्रण में रखा जा सकता है. उन्होंने बता दिया कि जनता की इच्छा के खिलाफ देश के उच्चतम पदों पर भी किसी को बिठाया जा सकता है. और पीसी पारेख ने तो कोयले में रंगे काले हाथ को ही जनता के सामने रख दिया है. ऐसे किताबों का इसी समय पर प्रकाशित होना सही है. कम से कम सभी सरकारें सचिवों से तो ईमानदारी बरतें.
नंदसिंह लाल, हुगली
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