सुनो-सुनो! किस्सा है यह कुरसी का

Published at :10 Apr 2014 5:28 AM (IST)
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सुनो-सुनो! किस्सा है यह कुरसी का

।। शैलेश कुमार।। (प्रभात खबर, पटना) मैं कुरसी हूं. जी हां, मैं कुरसी हूं. मंत्रियों का चैन हूं. चुनाव लड़नेवालों का अरमान हूं. अब यदि मैं यह कहूं कि मेरे ढेरों चाहनेवाले हैं, तो आप बोलेंगे कि देखो, अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रही है. पर गलत क्या कहा मैंने? देख लो अपने चारों ओर […]

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।। शैलेश कुमार।।

(प्रभात खबर, पटना)

मैं कुरसी हूं. जी हां, मैं कुरसी हूं. मंत्रियों का चैन हूं. चुनाव लड़नेवालों का अरमान हूं. अब यदि मैं यह कहूं कि मेरे ढेरों चाहनेवाले हैं, तो आप बोलेंगे कि देखो, अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रही है. पर गलत क्या कहा मैंने? देख लो अपने चारों ओर नजरें घुमा कर. अगर कुछ गलत कहा मैंने, तो बताना. कुछ नेताओं को मुझसे इतना ज्यादा प्यार है कि मेरी जुदाई दो पलों के लिए भी बरदाश्त नहीं होती. तभी तो जिसकी सरकार बनते देखते हैं, उसी के हो जाते हैं. उनका जुड़ाव मुझसे कुछ इस कदर है कि मेरे लिए दुश्मनों के भी गले लग जाते हैं.

सच में आशिक हों, तो इनके जैसे. मेरा जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है. जवानों से ले कर बुजुर्गो तक के. तभी तो दोनों पांव कब्र में लटके होने पर भी पार्टी छोड़ निर्दलीय के तौर पर भी रणभूमि में उतर आये हैं. दरअसल दोष बुढ़ापे का भी नहीं है. मेरा हुस्न ही कुछ ऐसा है कि इसने बुढ़ापे में भी जवानी की लहर दौड़ा दी है. कहते हैं न कि जंग और प्यार में सब कुछ जायज है. मेरे प्यार में भी कुछ नेता ऐसे पागल हुए हैं कि नामांकन दाखिल करने के बाद भी अपनी पार्टी को धोखा दे कर दूसरी में दाखिल हो गये. बेचारी पार्टी, न घर की बची न घाट की. सेनापति ही दगा दे गया. इसे कहते हैं मेरे प्यार का नशा.

चलो अपनी बात साबित करने के लिए कुछ और उदाहरण पेश करती हूं. हाल ही में एक चाचा मुझ पर ऐसे फिदा हुए कि मेरे लिए अपने तथाकथित बड़े भाई और भतीजी से भी दुश्मनी मोल ले ली. जब भतीजी उन्हें मनाने पहुंची, तो उसके प्यार को भी ‘इमोशनल अत्याचार’ का नाम दे दिया. कल तक जिनके लिए लड़ते थे, आज उन्हीं के खिलाफ लड़ रहे हैं. अब आप मुझ पर आरोप लगाओगे कि मैंने दो भाइयों में फूट डाल दी. अरे भाई, मैंने क्या किया? दोष मेरा थोड़े ही है. मुङो पाने की चाहत ही कुछ ऐसी है कि कुछ भी करवा देती है. कुछ दिनों पहले देश में बदलाव की हवा चली. हां, लोग तो ऐसा ही कह रहे थे. एक मुख्यमंत्री ऐसा बना, जो मुझ पर बैठ कर भी कहता फिरता था कि उसे मेरा मोह नहीं. मेरी हजारों बहनें कहने लगीं, अरे तूने किसे बैठा लिया है, उसकी वजह से हम विधवा बननेवाली हैं. बड़ा गुस्सा आया मुङो. आखिर ऐसा गेम खेला कि बेचारा खुद मुझसे तलाक ले पीछा छुड़ा कर भाग निकला.

वो तो गया, लेकिन एक चैनलवाले की नजर मुझ पर कुछ ऐसी पड़ी कि सब कुछ छोड़-छाड़ के मेरे लिए उसकी पार्टी में कूद गया. अब तो मुङो खुद पर अभिमान हो गया है. हर कोई मुङो ही पाना चाहता है. पूजा हो रही है मेरी देवियों की तरह. वाह क्या किस्मत पायी है मैंने? मुङो माफ करना भारत माता. मैं ऐसी नहीं थी. आपके कुछ सपूतों, नहीं-नहीं, कुछ कपूतों ने मुझे ऐसा बना दिया है. इंतजार में हूं कि आपके सपूत मुङो सुधार दें.

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