रुसवा साहब जब नींद से जागे..

Published at :01 Apr 2014 4:50 AM (IST)
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रुसवा साहब जब नींद से जागे..

सत्य प्रकाश चौधरी प्रभात खबर, रांची आज ‘नमो’ के राज्याभिषेक का 49वां दिन है. सुबह की चाय के बाद रुसवा साहब को पान की तलब महसूस हुई. घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही, सड़क निर्माण विभाग में इंजीनियर सिन्हा जी के घर के सामने उनके कदम ठिठक गये. एक बुलडोजर सिन्हा जी की […]

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सत्य प्रकाश चौधरी

प्रभात खबर, रांची

आज ‘नमो’ के राज्याभिषेक का 49वां दिन है. सुबह की चाय के बाद रुसवा साहब को पान की तलब महसूस हुई. घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही, सड़क निर्माण विभाग में इंजीनियर सिन्हा जी के घर के सामने उनके कदम ठिठक गये. एक बुलडोजर सिन्हा जी की तिनतल्ला कोठी ढहा रहा था और वह हथकड़ी में पुलिस जीप में बिठाये जा रहे थे.

आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था, पर दिल जुड़ा गया-एक ही सड़क को पांच-पांच बार कागज पर बनवा कर खूब माल बनाया था बेटा जी ने! वहां से आगे बढ़े कि कानों में ‘चचा सलाम’ की आवाज पड़ी. देखा कि सामने बिन्नी खड़ा था. कारपोरेट ड्रेस में. देवदास-नुमा दाढ़ी गायब थी. पता चला कि उसे नौकरी मिल गयी है. टॉप क्लास की. उसी कंपनी में जिसे झाड़ू छाप नेता चुनाव से पहले चोर-बेईमान बता रहे थे. रुसवा साहब को बड़ी खुशी हुई उसके लिए. बिन्नी पढ़ाई में अच्छा होने के नाते कभी मोहल्ले भर के लिए ‘ब्लैकबेरी’ था, पर नौकरी न मिलने की वजह से ‘झरबेरी’ मान लिया गया था. खैर, रुसवा साहब उस चौराहे पर पहुंचे जहां पप्पू की दुकान है.

उन्हें एक तरफ स्थित मसजिद कुछ सहमी-सहमी लग रही थी, तो दूसरी तरफ स्थित मंदिर के घंटे की आवाज ज्यादा ही बुलंद. यह वहम है या हकीकत, इसी में उलङो हुए वह पप्पू पनवाड़ी से रूबरू हुए. तभी उनकी निगाह ‘पान विक्रेता संघ’ की ओर से जारी नयी रेट लिस्ट पर पड़ी. क्या देखते हैं, पान मगही हो या बंगला, सभी का भाव दो-दो रुपये नीचे आ गया है. उनके सवालिया चेहरे को देख पप्पू ने कहा- हम लोग अखबार में पढ़े कि महंगाई नीचे आ गयी है, इसलिए भाव घटा दिये हैं.

रोज से एक पान ज्यादा बंधवा कर रुसवा साहब बच्चों के स्कूल पहुंचे. यहां तो और गजब हो गया. पता चला कि स्कूल ने फीस 200 रुपये घटा दी है. खुशी से चहकते हुए वह घर लौटे, तो दरवाजे पर ही मकान मालिक मिल गये जो एक बैंक में मैनेजर हैं. वह बोले- रुसवा साहब, अब किराया हर महीने 1000 रुपये कम दीजिएगा. रुसवा साहब का मुंह खुला का खुला देख उन्होंने समझाया, ‘‘देखिए, नये प्रधानमंत्री के आते ही रिजर्व बैंक ने एकदम चमत्कारिक मौद्रिक नीति घोषित की है.

उद्योगों और कृषि का उत्पादन भी बढ़ने लगा है. और, व्यापारी तो सब उनके ही समर्थक हैं, इसलिए उन्होंने मुनाफाखोरी कम कर दी है. इन सबका नतीजा यह हुआ है कि थोक और खुदरा मूल्य सूचकांक नीचे आ गया है. इसलिए मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी आपका किराया कम करके प्रधानमंत्री जी के मिशन को आगे बढ़ाऊं.’’ इतनी खुशी रुसवा साहब को बरदाश्त नहीं हुई और वह नींद से उठ बैठे. वह भाग कर खिड़की पर पहुंचे, देखते हैं कि सिन्हा जी की कोठी पर उसी नेता की पार्टी का झंडा लहरा रहा है, जिसके प्रधानमंत्री बनने का वह सपना देख रहे थे. दोस्तो, कहीं आप भी तो ऐसा ही सपना नहीं देख रहे???

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