रिजर्व बैंक के सुझाव तुरंत मानें

Published at :22 Mar 2014 4:56 AM (IST)
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रिजर्व बैंक के सुझाव तुरंत मानें

बिहार व झारखंड में नन बैंकिंग कंपनियों के फेर में गरीब निवेशकों के दो हजार करोड़ रुपये डूब गये हैं. निवेशकों को इस तरह की लूट से बचाने के लिए बिहार ने नन बैंकिंग कंपनियों के लिए एक नया एक्ट भी बनाया है. इस एक्ट के आलोक में रिजर्व बैंक ने बिहार सरकार को रजिस्ट्रार […]

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बिहार व झारखंड में नन बैंकिंग कंपनियों के फेर में गरीब निवेशकों के दो हजार करोड़ रुपये डूब गये हैं. निवेशकों को इस तरह की लूट से बचाने के लिए बिहार ने नन बैंकिंग कंपनियों के लिए एक नया एक्ट भी बनाया है. इस एक्ट के आलोक में रिजर्व बैंक ने बिहार सरकार को रजिस्ट्रार ऑफ चिट्स का पद सृजित करने की सलाह दी है.

केंद्रीय बैंक ने यह भी सुझाव दिया है कि नन बैंकिंग फरजीवाड़े से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट हो. मामलों की तेजी से सुनवाई होने और फैसले आने से फरजीवाड़ा करनेवालों में कानून का डर पैदा होगा. अभी हाल यह है कि लूट का शिकार लोग तो परेशान हो रहे हैं, लेकिन लुटेरे मौज में हैं. बिहार व झारखंड, दोनों राज्यों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें नन बैंकिंग कंपनियों के नाम पर ठगी करनेवालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, पर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो रही है.

उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई नहीं हो रही है. अदालतों में मुकदमों की संख्या इतनी अधिक है कि कई शिकायतों पर संज्ञान ही नहीं लिया जा सका है. इसे देखते हुए केंद्रीय बैंक के दोनों सुझावों पर तुरंत अमल किया जाना चाहिए. साथ ही निवेशकों को जागरूक करने के लिए रिजर्व बैंक व सेबी को अपने स्तर पर कार्यक्रम चलाने की जरूरत है. दोनों राज्य में साक्षरता दर औसत है. लोगों को निवेश के बारे में जानकारी नहीं है. आज भी बैंक तक पहुंच कम है. कई सरकारी बैंकों के अधिकारियों का रवैया भी ग्रामीणों संग दोस्ताना नहीं है. लोग खाता खुलवाने बैंक पहुंचते हैं, तो उनसे सीधे बात तक करने को अधिकारी तैयार नहीं होते. कई जगह लोग जमा व बचत के लिए डाकघरों पर निर्भर हैं. यहां भी स्थिति अनुकूल नहीं है.

डाकघर कर्मचारियों के अभाव से जूझ रहे हैं. इन्हीं स्थितियों का फायदा उठा फरजी नन बैंकिंग कंपनियां लोगों को लूट लेती हैं. इस तरह देखें, तो निवेशकों के प्रति धोखाधड़ी के लिए सरकारी उदासीनता भी कम जिम्मेवार नहीं है. केंद्रीय बैंक को समग्रता के साथ पूरी समस्या को देखने और फिर उसके समाधान के लिए चतुर्दिक प्रयास करने की आवश्यकता है. वरना, टुकड़े-टुकड़े में दिये गये सुझाव का न तो कोई असर होगा और न ही छोटे निवेशकों को बचाया जा सकेगा.

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