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patna

  • Feb 19 2019 3:37PM
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को खाली करना पड़ेगा सरकारी आवास, इनके 'बंगले' का बदलेगा पता

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को खाली करना पड़ेगा सरकारी आवास, इनके 'बंगले' का बदलेगा पता
फोटो : अमृत जयकिशन

पटना : पटना उच्च न्यायालय ने बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटन करने के प्रदेश सरकार का आदेश मंगलवार को रद्द कर दिया. पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एपी साही और न्यायमूर्ति अंजना मिश्र की खंडपीठ ने बिहार सरकार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला आवंटित किए जाने वाले नियम को असंवैधानिक करार देते हुए इसे कड़ी मेहनत से अर्जित सार्वजनिक धन का "दुरुपयोग" बताया.

अदालत ने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के पद से मुक्त होने के बाद जीवनभर के लिये बंगला प्रदान करने जैसी सुविधा प्रदान करना पूरी तरह से गलत है. पटना उच्च न्यायालय के इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्रा, सतीश प्रसाद सिंह और जीतन राम मांझी प्रभावित हो सकते हैं.

खंडपीठ ने गत 7 जनवरी को बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की अपील की सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगले पर स्वत: संज्ञान लिया था. तेजस्वी यादव ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें प्रदेश की पिछली महागठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें मिले 5 देशरत्न मार्ग बंगले का आवंटन बरकरार रखने की उनकी याचिका खारिज कर दी गयी थी.

खंडपीठ ने बिहार सरकार और जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला आवंटित किया गया है, उनसे जवाब मांगा था कि उच्चतम न्यायालय के लोक प्रहरी मामले में फैसले के आलोक में राज्य सरकार द्वारा 2010 में बिहार स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (संशोधन) अधिनियम को क्यों नहीं रद्द किया गया. इस अधिनियम के तहत बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए जीवनभर के लिए बंगला के आवंटन का प्रावधान किया गया था. इससे पूर्व मई 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित सरकारी बंगलों का आवंटन निरस्त कर दिया था.

हाईकोर्ट के फैसले पर बोले मांझी
बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. मांझी ने कहा कि सिर्फ आपसी प्रतिद्वंद्विता के कारण ऐसा किया गया है. ये हमारे राजनीतिक जीवन को खत्म करने का प्रयास है. गौर हो कि पटना हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी को भी सरकारी बंगला खाली करना होगा. मांझी ने कहा कि बिहार सरकार को बंगला का मामला नहीं उठाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार को कोई कम नही रह गया है.

फैसले के बाद राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर पसरा सन्नाटा
पटना हाईकोर्ट के फैसले से लालू परिवार का पता भी बदल जायेगा. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पद से हटने के बाद इस तरह की सुविधाएं दिया जाना बिल्कुल गलत है. फैसला आने के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड पर सन्नाटा पसर गया है. वहीं, लालू परिवार के करीबी और राजद विधायक भोला यादव ने कहा कि न्यायपालिका का वे सम्मान करेंगे और कोर्ट के फैसले के पढ़ने के बाद इस पर कोई निर्णय लिया जायेगा.

फैसले पर सूबे में गरमायी सियासत
हाईकोर्ट के फैसले पर राजद सांसद मनोज झा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्रियों के और भी आवंटित आवास की जांच करने की जरूरत है कि मुख्य सचिव के नाम पर आवंटित बंगले में कौन रह रहा है. इस सबकी जांच होनी चाहिए. वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने कहा कि जनता के बीच रहने के कारण सुरक्षा की जरूरत होती है इसलिए बंगले में रहते थे और सरकारी सुविधाएं लेते थे. जबकि, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा नेता मंगल पांडेय ने कहा कि कोर्ट के फैसले का हम सभी सम्मान करते हैं और सभी को कोर्ट के फैसले को मानना चाहिए. वहीं नीतीश सरकार में मंत्री जय कुमार सिंह ने भी कहा कि कोर्ट के फैसले का सभी को सम्मान करने की जरूरत है.

पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगला आवंटित

- सतीश कुमार सिंह 33 हार्डिंग रोड
- डॉ जगन्नाथ मिश्र 41, क्रांति मार्ग
- लालू प्रसाद 10 सर्कुलर रोड
- राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड
- जीतन राम मांझी 12 एम स्ट्रैंड रोड
- नीतीश कुमार सात सर्कुलर रोड(वर्तमान में मुख्य सचिव को आवंटित)

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