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बेरोजगारी ने छिनी मेहबूबा, तो मेहबूब बन गया "बेवफा चायवाला", प्रेमी जोड़े को पिलाने लगा मुफ्त चाय

Updated at : 13 Mar 2022 3:30 PM (IST)
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बेरोजगारी ने छिनी मेहबूबा, तो मेहबूब बन गया "बेवफा चायवाला", प्रेमी जोड़े को पिलाने लगा मुफ्त चाय

यह दुकान आज प्रेमी जोड़ों का पसंदीदा जगह है. इसका एक खास करण यह है कि मंटन यहां अपनी प्रेम की दास्तां सुनानेवाले हर मेहबूब को मुफ्त में चाय पिलाते हैं.

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नवादा. हजार राहें मुड़ के देखी कहीं से कोई सदा न आयी, बड़ी वफा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई.. बेरोजगारी के कारण मेहबूबा के मुंह मोड़ लेने के बाद नवादा के नरहट निवासी मंटन कुमार ने रोजगार की तलाश छोड़ चाह की दुकान खोल ली और उसका नाम रख दिया, बेवफा चायवाला. यह दुकान आज प्रेमी जोड़ों का पसंदीदा जगह है. इसका एक खास करण यह है कि मंटन यहां अपनी प्रेम की दास्तां सुनानेवाले हर मेहबूब को मुफ्त में चाय पिलाते हैं.

छह माह तक काफी सदमे में रहे मंटन

अपनी दास्तां बताते हुए मंटन कहते हैं कि बेरोजगारी ने उनसे उनका प्यार छीन लिया. बेरोजगारी के कारण उनकी प्रेमिका ने उनसे मुंह मोड़ लिया. प्रेमिका के मुंह मोड़ लेने के छह माह तक वह काफी सदमे में रहे. इसके बाद उसने चाय की दुकान खोलने का निर्णय लिया. चाय की दुकान खोलने के लिए जगह का चयन भी वहीं किया जहां वो प्रेमिका अक्सर मिला करते थे. मंटन बताते हैं कि नगर के गांधी स्कूल के बगल में चाय दुकान खोलने का फैसला करने के बाद स्टॉल के नाम पर भी मंथन किया और उसका नाम रखा- बेवफा चायवाला.

मंटन कहते हैं कि बेरोजगारी ने बहुत गहरा जख्म दिया. उस दौरान कई मित्रों से अपना हाल बयां किया. इसके बाद साथियों की सलाह से दुकान खोलने का फैसला लिया और दोस्तों की राय से ही दुकान का नाम बेवफा चायवाला रखा.

दोस्तों ने दिया सहारा

मंटन कहते हैं कि मेहबूबा के मुंह मोड़ लेने के बाद दोस्तों ने बड़ा सहारा दिया. अगर दोस्त सहारा नहीं देते तो मैं भी प्यार में घोखा खाने के बाद आम लड़कों की तरह अपना कॅरियर बर्बाद कर लेता. शराब पीने लग जाता या गलत रास्ते पर भटक जाता, लेकिन दोस्तों ने मेहबूबा की बेवफाई को वफा के साथ निभाने का रास्ता दिखाया. हमने बिजनेस का रास्ता अख्तियार किया, ताकि बेरोजगारी का दाग मिट जाये.

चाय में छिपा है प्यार का मरहम

मंटन कहते हैं कि इस चाय में प्यार का मरहम छिपा है. उनकी दुकान पर प्यार में धोखा खाये लोगों के अकेलेपन का यहां पूरा ख्याल रखा जाता है. दुकान के साइनबोर्ड पर कई शेर लिखे गये हैं. मंटन ने साइनबोर्ड पर लिखी शायरी ‘एक तेरा साथ ही तो है मेरे पास, कमवक्त कौन अकेले में चाय पीता.’ दिखाते हुए कहते हैं कि हम शायरी के जरिए भी दिल के दर्द को कम करते हैं. उन्होंने कहा कि यह अब प्यार में धोखा खाये लोगों के लिए अच्छा ठिकाना बन गया है. लोग बैठते हैं. आपस में बातचीत कर एक दूसरे से अपना हाल बयां करते हैं. इससे उनकी दर्द कम होती है.

अपनी दुकान पर प्रेमियों की भीड़ के सवाल पर मंटन कहते हैं कि यह दुकान सिर्फ टूटे दिलवालों के लिए नहीं है. यहां प्रेमी जोड़ियों के लिए विशेष ऑफर है. प्रेमी जोड़ा जब अपनी प्रेम कहानियां बयां करते हैं, तब उन्हें फ्री में चाय पिलाते हैं.

धोखा खाए मरीज बहुत हैं

बी फार्मा कर रहे मंटन कहते हैं कि को इस दुकान पर भाई टनटन और दीपक सहयोग करता है. मंटन के साथी मंजीत कहते हैं कि इसे चाय की दुकान नहीं कहिए. यह अस्पताल है. यहां टूटे हुए दिलों का इलाज होता है. इस चाय की मिठास में धोखा खाए लोगों को सुकून मिलता है. नवादा में ऐसे दुकान की बहुत जरूरत है. बेरोजगारी के कारण धोखा खाए मरीज बहुत हैं.

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