मोहन यादव को ही क्यों चुना गया मध्य प्रदेश का नया मुख्यमंत्री? कहीं ये तो वजह नहीं

Bhopal: BJP MLA from Ujjain South Mohan Yadav being greeted by Madhya Pradesh BJP President VD Sharma after being elected as the BJP’s legislature party leader in the state, in Bhopal, Monday, Dec. 11, 2023. Yadav will be the next CM of the state. (PTI Photo) (PTI12_11_2023_000232B)
मध्य प्रदेश के नये मुख्यमंत्री बनने जा रहे मोहन यादव ने कहा कि वह राज्य के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए काम करेंगे. उन्होंने उनके जैसे छोटे कार्यकर्ता पर भरोसा जताने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व के प्रति आभार जताया.

बीजेपी ने एक बार फिर से चौंकाते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेता और लगातार तीसरी बार विधायक बने मोहन यादव को मध्य प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री चुन लिया. बीजेपी विधायक दल ने यादव (58) को अपना नेता चुना. इधर नये मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के तुरंत बाद शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. बीजेपी के इस चौकाने वाले फैसले के बाद हर किसी के मन में एक सवाल जरूर उठ रहा है कि आखिर मोहन यादव को ही एमपी का नया सीएम क्यों चुना गया? जबकि इस रेस में चार बार के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीडी शर्मा और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता का नाम आगे चल रहा था.

मोहन यादव चार बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज चौहान (64) का स्थान लेंगे
मोहन यादव चार बार मुख्यमंत्री रहे चौहान (64) का स्थान लेंगे. चौहान ने 2005, 2008, 2013 और 2020 में मुख्यमंत्री का पदभार संभाला. मध्य प्रदेश के नये मुख्यमंत्री बनने जा रहे मोहन यादव ने कहा कि वह राज्य के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए काम करेंगे. उन्होंने उनके जैसे छोटे कार्यकर्ता पर भरोसा जताने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व के प्रति आभार जताया.

मोहन यादव को ही क्यों चुना गया मुख्यमंत्री?
विधायक दल की बैठक में निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव दिया था. जिसपर सबकी सहमति बनी. यादव सीएम की रेस में कभी नहीं रहे, लेकिन अचानक उनका नाम सामने आने से सभी चौंक गए. उज्जैन दक्षिण से तीसरी बार जीत दर्ज करने वाले यादव को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी माना जाता है. वह एक प्रमुख ओबीसी नेता हैं. बीजेपी अपने इस फैसले से ओबीसी समुदाय को साधने की कोशिश की है. इसके पीछे अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव है. ओबीसी मप्र की आबादी का 48 प्रतिशत से अधिक हैं. 2003 में उमा भारती के मुख्यमंत्री बनने के बाद से बीजेपी ने चौथी बार ओबीसी नेताओं पर अपना भरोसा जताया है. भारती के बाद, मध्य प्रदेश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो और ओबीसी मुख्यमंत्री- बाबूलाल गौर और चौहान को देखा.
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कौन हैं मोहन यादव?
मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. उन्होंने छात्र नेता के रूप में राजनीति की शुरुआत की है. वह 1982 में माधव साइंस कॉलेज के ज्वाइंट सेक्रेटरी चुने गए थे. उसके बाद 1984 में अध्यक्ष बने. 1984 में ही यादव एबीवीपी उज्जैन के नगर मंत्री बने. बाद में वो 1988 में आरएसएस उज्जैन शाखा के सहखंड कार्यवाह बने. उसके बाद उन्होंने कई बड़ी जिम्मेवारियों को भी निभाया. वह पहली बार 2013 में उज्जैन दक्षिण से विधायक चुने गए. इसके बाद 2018 और फिर 2023 में विधानसभा सीट बरकरार रखी. भाजपा विधायक निवर्तमान मुख्यमंत्री चौहान के मंत्रिमंडल में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे.

संघ के करीबी हैं मोहन यादव
मोहन यादव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हैं. मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम की घोषणा के पीछे इसे भी बड़ी वजह बताया जा रहा है.

बीजेपी ने एमपी में दर्ज की प्रचंड जीत
मालूम हो बीजेपी ने 17 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में 230 में से 163 सीट जीतकर कांग्रेस (66 सीट) को दूसरे स्थान पर धकेल दिया और मप्र में अपनी सत्ता बरकरार रखी. चुनाव से पहले, भाजपा ने किसी मुख्यमंत्री चेहरे को पेश नहीं किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यापक लोकप्रियता पर भरोसा किया. मोदी ने राज्य में बड़े पैमाने पर प्रचार किया था.
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