Uttarkashi Cloudburst: 10 मिनट में पहुंचे सेना के 150 जवान, बचाई 20 लोगों की जान, प्रत्यक्षदर्शी ने बताया तबाही का आंखों देखा हाल

Published by : Pritish Sahay Updated At : 05 Aug 2025 8:39 PM

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Uttarkashi Cloudburst

Uttarkashi Cloudburst: उत्तराखंड में बादल फटने से तबाही मची है. उत्तरकाशी जिले की धराली में बादल फटने के कारण खीर गंगा नदी में बाढ़ आ गई. मलबे के नीचे दबने से चार लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा कई घर और होटल तबाह हो गए हैं. लोगों का कहना है कि हादसे के बाद 50 से ज्यादा लोग लापता है. वहीं बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.

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Uttarkashi Cloudburst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मंगलवार का दिन बड़ा अमंगल लेकर आया.  धराली गांव में बादल फटने से कई इलाकों में तबाही मच गई. बादल फटने की घटना के बाद अचानक से भीषण बाढ़ आ गई. आधिकारिक रूप से हादसे में चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग लापता हैं. सोशल मीडिया हादसे के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसमें पानी की ऊंची लहरें उठती दिखाई दे रही हैं जिनकी चपेट में आकर मकान, होटल और अन्य इमारतें ढहती हुई दिख रही हैं. कुछ और वीडियो में दिख रहा है कि लोग पानी से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. लेकिन, बहाव इतना तेज है कि लाख बचने की कोशिश के बाद भी लोग बहे जा रहे हैं.

प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाया आंखों देखा हाल

मुखबा गांव के रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी सुभाष चंद्र सेमवाल ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा भयावह दृश्य कभी नहीं देखा.सेमवाल ने कहा कि दोपहर बाद जब वह आराम करने जा रहे थे उसी समय उन्हें बहुत तेज रफ्तार से पानी और पत्थरों के बहने की आवाज सुनाई दी. आवाज सुनकर वो और उनका परिवार घर से बाहर निकल आए. सेमवाल ने कहा “जब हमने खीरगंगा में भारी मात्रा में पानी बहकर नीचे की ओर आते देखा तो हम सब पहले तो घबरा गए, फिर हमने धराली बाजार में रहने वाले लोगों को सतर्क करने के लिए सीटियां बजायीं और चिल्ला-चिल्ला कर उन्हें वहां से भागने को कहा.”

देखते-देखते मच गई चीख पुकार

सेमवाल ने कहा कि उन लोगों की आवाज सुनकर कई लोग होटल से निकलकर भागे. लेकिन, बाढ़ का वेग इतना तेज था कि देखते ही देखते वे सब उसमें समा गए और सब कुछ वहीं दफन हो गया. भूस्खलन और बादल फटने की घटना ने सेना के शिविर और हमारी बचाव टुकड़ियों के एक हिस्से को भी प्रभावित किया. उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना पर ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर मंदीप ढिल्लों ने बताया कि भूस्खलन और बादल फटने की घटना ने सेना के शिविर और हमारी बचाव टुकड़ियों के एक हिस्से को भी प्रभावित किया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हर्षिल में नदी के किनारे बना हेलीपैड बह गया है. वहीं भारी बारिश के कारण राहत और बचाव में काफी मुश्किल हो रही है.

राहत और बचाव के लिए पहुंची सेना

आपदा की सूचना मिलते ही मौके पर सबसे पहले सेना पहुंची, जवानों ने तत्काल प्रभाव से राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया. जानकारी के अनुसार सेना का हर्षिल कैंप घटनास्थल से केवल चार किलोमीटर दूर है और इस कारण सेना के करीब 150 जवान केवल 10 मिनट में ही वहां पहुंच गए और 20 लोगों को बचा लिया. कई जगह सेना के जवानों ने रस्सी के सहारे लोगों को खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. सेना द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो में हर जगह मलबा दिखाई दे रहा है. सेना के एक अधिकारी ने बताया कि लोगों को आपदाग्रस्त धराली से फिलहाल दूर रहने को कहा गया है. एसडीआरएफ के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी 50 जवानों की विशेषज्ञ टीम भी अपने जरूरी उपकरणों के साथ राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई है.

धराली की तबाही ने ताजा कर दी केदारनाथ और ऋषिगंगा आपदा याद

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में मंगलवार दोपहर बादल फटने से मची भीषण तबाही ने 2013 की केदारनाथ और 2021 की ऋषिगंगा आपदा की भयावह यादें ताजा कर दी है. केदारनाथ और ऋषिगंगा में आई बाढ़ की तरह ही धराली की खीरगंगा नदी में आया पानी और मलबे का विनाशकारी सैलाब कुछ क्षणों में ही बड़े-बड़े होटलों और मकानों को अपने साथ बहा ले गया और गंगोत्री धाम के रास्ते में स्थित खूबसूरत क्षेत्र पलक झपकते ही मलबे के ढेर के नीचे दब गया.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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