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यूपी में SIR: सपा सांसद डिंपल यादव ने मैनपुरी DM को लिखी चिट्ठी, SIR नोटिस में देरी पर आपत्ति जताई

26 Jan, 2026 9:05 am
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Uttar Pradesh SIR SP MP Dimple Yadav writes to Mainpuri DM raises concern over delay in SIR notices.

सपा सांसद डिंपल यादव. फोटो- एक्स.

उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का दूसरा चरण देरी से शुरू हुआ. इसके तहत जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा है, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमी है. इस मामले पर सपा सांसद डिंपल यादव ने मैनपुरी के डीएम को चिट्ठी लिखकर कार्रवाई करने की मांग की है.

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UP SIR: मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में हो रही देरी और गड़बड़ियों को लेकर डीएम को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा कि इस अभियान का दूसरा चरण करीब 10 दिन देर से शुरू हुआ, जिससे पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है. डिंपल यादव ने अपने पत्र में यह भी बताया कि जिन मतदाताओं का ब्योरा रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा, उन्हें नोटिस बहुत धीमी रफ्तार से भेजे जा रहे हैं. उन्होंने लिखा कि अभी हालात ऐसे हैं कि हर सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी एक दिन में सिर्फ लगभग 150 नोटिस ही जारी कर पा रहा है.

उन्होंने मांग की कि दूसरे चरण के नोटिस जल्दी जारी किए जाएं और व्यवस्था में सुधार कर रोज ज्यादा नोटिस भेजने और उनका निपटारा करने की क्षमता बढ़ाई जाए. डिंपल यादव ने प्रशासन से तुरंत कदम उठाने को कहा ताकि SIR अभियान का मकसद प्रभावित न हो.

इससे पहले सपा के ही सांसद राम गोपाल यादव ने भी SIR पर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि देश में इस तरह की प्रक्रिया की जरूरत नहीं है और इसे ‘सत्ता में बने रहने का तरीका’ बताया था. राम गोपाल यादव ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई इस तरह के तरीकों से सत्ता में आता है, तो देश में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात हो सकते हैं. उनका कहना था, “SIR की कोई जरूरत नहीं थी… क्या 2014 से पहले ऐसा हुआ था? ये सब सत्ता में टिके रहने के तरीके हैं. जो सामान्य तरीके से वोट लेकर जीतता है, उसका कोई विरोध नहीं करता, लेकिन अगर कोई चाल से सत्ता में आता है, तो लोगों ने नेपाल और बांग्लादेश में उसके नतीजे देखे हैं.”

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया किसे भेजे जा रहे नोटिस

हालांकि, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने, शुक्रवार को बताया कि 2026 की SIR प्रक्रिया के तहत जिन मतदाताओं की जानकारी, 2003 के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं. सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल ही नहीं, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर भी नोटिस दे रहे हैं. दस्तावेजों की जरूरत जन्मतिथि के आधार पर तय की गई है. 

SIR में कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं

जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों को केवल अपने दस्तावेज देने होंगे, जबकि उससे कम उम्र वालों को माता-पिता से जुड़े रिकॉर्ड भी जमा करने होंगे. जन्म या निवास के प्रमाण के लिए 13 तरह के दस्तावेज मान्य हैं, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, आधार और अन्य सरकारी पहचान पत्र. आधार के इस्तेमाल के लिए 2025 के नियम लागू होंगे. बिहार की SIR मतदाता सूची के कुछ हिस्से भी मान्य माने जाएंगे.

उत्तर प्रदेश में SIR के तहत दावे और आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी तक ली जाएंगी. इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को जारी होगी. शुक्रवार को जारी SIR बुलेटिन के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग को अब तक 18,764 दावे और आपत्तियां मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए मिली हैं, जबकि 106 आवेदन नाम हटाने के लिए प्राप्त हुए हैं.

एएनआई के इनपुट के साथ.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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