यूपी चुनाव 2027 : राजभर की पार्टी ने मांगी 32 सीटें, आजमगढ़ पर नजर
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 14 Jun 2026 12:27 PM
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर (माइक के सामने)
UP Election 2027 : एनडीए की सहयोगी पार्टी सुभासपा ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 32 सीटों पर दावा ठोक दिया है. पार्टी की खास नजर समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ पर है, जहां वह अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में जुटी है.
UP Election 2027 : सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से आगामी चुनाव को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर काम कर रही है और उसने एनडीए में 32 सीटों पर हिस्सेदारी मांगी है. उन्होंने कहा कि पार्टी का मकसद सपा के गढ़ आजमगढ़ पर कब्जा करना है. राजभर ने कहा कि मैं खुद अतरौलिया विधानसभा में सक्रिय हूं और वहीं से एनडीए उम्मीदवार रहूंगा. बातचीत हो चुकी है. आजमगढ़ में मेहनगर, दीदारगंज और अतरौलिया पर सुभासपा ने दावेदारी पेश की है.
इस बीच, बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एनडीए में सभी बड़े फैसले सहयोगी दलों के नेताओं से चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं. उन्होंने बताया कि 2027 विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भी एनडीए नेतृत्व और सुभासपा के बीच बातचीत होगी. आपसी सहमति बनने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
सपा से नाता राजभर ने तोड़ लिया था
सपा पर निशाना साधते हुए अरुण राजभर ने दावा किया कि पिछले विधानसभा चुनावों में उसे अ्धिक सीटें मुख्य रूप से पूर्व उत्तर प्रदेश में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की ताकत की वजह से मिली थीं. उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन में सुभासपा ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और छह सीटें जीतीं, लेकिन चुनाव परिणाम आने के कुछ माह बाद ही राजभर ने यह नाता तोड़ लिया और एनडीए में फिर से शामिल हो गये. इस बार राजभर की तैयारी सपा के सबसे प्रमुख गढ़ आजमगढ़ से ही देखी जा रही है. इसके पहले एनडीए गठबंधन में 2017 में सुभासपा को आठ सीटें मिली थीं जिनमें से पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर समेत चार सदस्य विधानसभा चुनाव जीते थे. ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने दावा किया कि इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा को ‘‘सबक सिखाया जाएगा.’’
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगातार निशाने साध रहे हैं। अब उन्होंने सपा के सबसे बड़े गढ़ आजमगढ़ और उनके ‘‘एमवाई’’’ (मुसलमान-यादव) समीकरण को चुनौती देनी शुरू कर दी है.
हिंदुत्व के एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहे हैं राजभर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश में 2027 चुनाव की तैयारी को लेकर अखिलेश के ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक नारे की धार कुंद करने के लिए एनडीए की ओर से सबसे आगे राजभर ही दिख रहे हैं. वह यादव पर हमले के साथ हिंदुत्व के एजेंडे को प्रमुखता दे रहे हैं. दो दशक से ज्यादा की सियासत में पहली बार मुसलमानों के संवेदनशील मामलों पर आक्रामक नजर आ रहे हैं. कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुखर रह चुके राजभर अब हिंदुत्व के एजेंडे के जरिये उनके सुर में सुर भी मिला रहे हैं.
राजभर को यहां से भी मिल रही है ताकत
सियासी जानकार इसे राजभर की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं. दरअसल राजभर अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा के गढ़ आजमगढ़ को अपना सियासी केंद्र बना रहे हैं. आजमगढ़ और आसपास के जिलों में यादव-मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक हैं और सपा के पीडीए फॉर्मूले का आधार भी यही दो वर्ग माने जाते हैं. राजनीतिक जानकारों का दावा है कि ऐसे में राजभर आजमगढ़ में अति पिछड़ों की अन्य जातियों में पैठ बढ़ाकर आसपास के जिलों में सपा के पीडीए समीकरण को कमजोर करना चाहते हैं. इसके लिए एनडीए के संजय निषाद की अगुवाई वाले निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व की कुर्मी बिरादरी बहुल (अपना दल-सोनेलाल) समेत सहयोगी दलों से भी राजभर को ताकत मिल रही है.
आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर सपा का कब्जा
2022 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर सपा का कब्जा रहा. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में बढ़त कायम रखते हुए राज्य की 80 सीटों में आजमगढ़, घोसी, गाजीपुर, बलिया, सलेमपुर, सुलतानपुर, फैजाबाद (अयोध्या), श्रावस्ती और प्रतापगढ़ समेत कुल 37 लोकसभा सीटें जीती थीं.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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