असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- बॉर्डर स्टेट में रहने वाले हर परिवार की नागरिकता की जांच जरूरी

हिमंत बिस्वा सरमा
Himanta Biswa Sarma : असम सरकार केंद्र सरकार को यह सुझाव देगी कि सीमावर्ती राज्यों में रहने वाले प्रत्येक परिवार की नागरिकता की जांच की जाए. इसकी वजह वे यह मानते हैं कि असम समझौते के बावजूद देश में घुसपैठ जारी था, क्योंकि फेंसिंग का काम उस स्तर पर नहीं हो पाया था, जैसा कि होना चाहिए था.
Himanta Biswa Sarma : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि भारत-बांग्लादेश की पूरी सीमा पर बाड़ (फेंसिंग) लगाना चाहिए था. असम समझौते के तहत केवल असम और बांग्लादेश की सीमा पर फेंसिंग का काम किए जाने की शुरुआत हुई. यह समझौता एक ऐतिहासिक भूल थी, क्योंकि नाॅर्थ-ईस्ट के कई अन्य राज्यों की सीमाएं भी बांग्लादेश से लगती हैं, लेकिन वहां फेंसिंग का काम नहीं हुआ.
असम समझौते के वक्त कुछ गलतियां हुई
गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम समझौते के समय मुख्य मांग असम-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग कराने की थी, लेकिन उस समय यह नहीं सोचा गया कि मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और पश्चिम बंगाल जैसे अन्य सीमावर्ती राज्यों में भी समान रूप से बाड़बंदी की जानी चाहिए. परिणाम यह हुआ कि जिन राज्यों में फेंसिंग नहीं की गई, वहां से घुसपैठ जारी रहा.उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक सीमा का बड़ा हिस्सा खुला रहा. उन्होंने कहा कि यदि एक स्थान पर सीमा बंद कर दी जाए और दूसरे स्थान से आवागमन जारी रहे, तो सुरक्षा उपायों का कोई फायदा नहीं मिलता है.
1985 के समझौते पर अब काम हुआ
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 1985 में जो समझौता हुआ था उसपर अब काम हो रहा है. अब स्थिति काफी बदल रही है. मेघालय में सीमा फेंसिंग का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि त्रिपुरा में करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हुआ है. मिजोरम में भी काम जारी है और पश्चिम बंगाल में भी अब फेंसिंग का काम शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दशकों में बांग्लादेश से होने वाले अवैध आवागमन को पूरी तरह नहीं रोका जा सका.
डेमोग्राफी चेंज की जांच होगी
सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलावों यानी डेमोग्राफी चेंज का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की है.असम सरकार केंद्र को सुझाव देगी कि सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले प्रत्येक परिवार की नागरिकता की जांच की जाए. उनका मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में आए बदलावों का अध्ययन और नागरिकता संबंधी सत्यापन भविष्य में सीमा सुरक्षा तथा अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं.
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By रजनीश आनंद
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रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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