एएन-32 विमान दुर्घटना पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दुख जताया, कहा-हर मदद के लिए तैयार

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 13 Jun 2026 6:12 PM

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा

AN-32 plane crash : रूस में निर्मित एएन-32 विमान नियमित उड़ान के दौरान शनिवार सुबह लगभग 10 बजे दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस दुर्घटना में वायुसेना के 5 कर्मियों की मौत हो गई. इस दुर्घटना पर असम के मुख्यमंत्री ने अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की है.

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AN-32 plane crash : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जोरहाट में हुई विमान दुर्घटना पर शोक जताया है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट लिखकर कहा कि वे इस दुर्घटना में भारतीय वायुसेना के 5 कर्मियों की मौत से बहुत दुखी हैं.

हर मदद को तैयार है असम सरकार

हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने सोशल मीडिया में लिखा कि दुर्घटना के बाद राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है. उन्होंने अपने शोक संदेश में लिखा कि कर्तव्य निर्वहन के दौरान वायुसेना कर्मियों की मौत अत्यंत दुखद है. उन्होंने अपने मैसेज में लिखा कि जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह,फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम का निधन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. असम की जनता की ओर से मैं इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं व्यक्त करता हूं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जताया दुख

असम के जोरहाट में एएन-32 विमान दुर्घटना पर दुख जताते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि मैं 5 वायु योद्धाओं की मृत्यु से अत्यंत दुखी हूं. स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनका साहस और राष्ट्र सेवा हमेशा गर्व और कृतज्ञता के साथ याद की जाएगी. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं हैं. इस दुख की घड़ी में पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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