दिल्ली दंगा के मुख्य आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद जमानत के लिए एक बार फिर पहुंचे कोर्ट
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 13 Jun 2026 6:00 PM
शरजील इमाम और उमर खालिद
Delhi riots: छह साल से हिरासत में रहने के बावजूद केस में कोई प्रगति नहीं हुई है, इस आधार पर दिल्ली दंगा के मुख्य आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद ने जमानत के लिए दिल्ली की एक अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उमर खालिद को हाल ही में मां के इलाज के लिए 1-3 जून तक पेरोल पर रिहा किया गया था.
Delhi riots : दिल्ली दंगा 2020 के मुख्य आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद ने दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में यी जमानत याचिका दाखिल की है. शरजील इमाम की पिछली जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी, 2026 को खारिज कर दिया था. ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है, मामले की सुनवाई 4 जुलाई को होनी है.
6 साल से हिरासत में हैं, केस की सुनवाई में नहीं हुई कोई प्रगति
शरजील इमाम और उमर खालिद की याचिकाओं में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज किए जाने के छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है.अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध सैनी के समक्ष दायर इन नयी याचिकाओं पर अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई के लिए निर्धारित कर दी है. जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि पांच अन्य आरोपियों को राहत दे दी थी.
शरजील और उमर पर मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा था कि यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि मामले के सभी आरोपी साजिश में एक समान भूमिका में नहीं हैं. इसी वजह से कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी.उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों के खिलाफ यूएपीए और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है.
दिल्ली दंगा में मारे गए थे 53 लोग
सीएए और एनआरसी के विरोध के दौरान भड़की हिंसा में दिल्ली में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के दो सितंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें साजिश मामले में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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