Happy Independence Day : पिछले 75 वर्षों में किन रास्तों से गुजरा आज का नया भारत , जानें 10 बड़ी बातें

Updated at : 15 Aug 2022 3:26 PM (IST)
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Happy Independence Day : पिछले 75 वर्षों में किन रास्तों से गुजरा आज का नया भारत , जानें 10 बड़ी बातें

14 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ और 15 अगस्त 1947 की सुबह आजादी का जश्न मनाने से पहले राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का ध्वजारोहण किया गया. तब से लेकर आज तक हम भारत के निर्माण में रोजाना कोई न कोई नया आयाम गढ़ते चले आ रहे हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी ही रहेगा.

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नई दिल्ली : भारत आज अपनी आजादी के 75वें वर्ष पर स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है. आज के जिस नए भारत में हम खुलकर स्वतंत्र तरीके से सांसें ले रहे हैं, क्या आप जानते हैं कि आज के इस भारत के निर्माण में हम पिछले 75 वर्षों में किन-किन रास्तों से होकर गुजरे हैं? 14 अगस्त 1947 की आधी रात को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ और 15 अगस्त 1947 की सुबह आजादी का जश्न मनाने से पहले राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का ध्वजारोहण किया गया. तब से लेकर आज तक हम भारत के निर्माण में रोजाना कोई न कोई नया आयाम गढ़ते चले आ रहे हैं और भविष्य में भी यह सिलसिला जारी ही रहेगा. भविष्य के लक्ष्यों को जानने से पहले हम सबको उन कीर्तिमानों को जानना बेहद आवश्यक है, जिसकी बिसात पर हम नित्य नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. आइए, जानते हैं पिछले 75 सालों के सफर के दौरान की 10 बड़ी बातों के बारे में…

1. जब भारत को मिली अंग्रेजों की गुलामी से आजादी

14 और 15 अगस्त 1947 की दरम्यानी आधी रात को भारत अंग्रेजों के गुलामी से आजाद हुआ. करीब दो सौ सालों से अधिक समय तक अंग्रेजों के हाथों गुलामी की जंजीर में जकड़े भारत को यह आजादी काफी मेहनत और बलिदान के बाद हासिल हुई. अंग्रेजों के उपनिवेशवाद की जड़ को उखाड़ने में वर्षों तक आंदोलन किए गए. क्रांतिकारियों ने बलिदानी दी, जेल की सलाखों के पीछे भेजे गए और यहां तक कि कालापानी की सजा तक दी गई. कभी सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत को अंग्रेजों ने गुलामी की जंजीर पहना रखी थी.

2. आर्थिक विकास दर

जिस समय भारत आजाद हुआ, उस समय देश की साक्षरता दर केवल 12 फीसदी थी. इसका आर्थिक विकास दर 3 फीसदी से भी कम थी और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा बेहद अपर्याप्त था. तभी से भारत ने अपना भाग्य बदलना शुरू कर दिया और आज भारत दुनिया में अपना परचम लहरा रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, जब अंग्रेजों ने भारत को अपना गुलाम बनाया था, तब दुनिया की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में भारत की हिस्सेदारी 22 फीसदी से अधिक थी, लेकिन 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के समय यह घटकर 3 फीसदी रह गई. वर्ष 1950-51 में जीडीपी का आंकड़ा 2.93 लाख करोड़ रुपये था.

3. विभाजन के बाद एक नये राष्ट्र का उदय

14 अगस्त 1947 को लंबे संघर्ष के बाद आजादी मिलने से पहले धार्मिक आधार पर भारत को दो भागों में विभाजित कर दिया गया. इस विभाजन के बाद एक नए राष्ट्र पाकिस्तान का उदय हुआ. इसी समय भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना और धर्म के आधार पर पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान) ने जन्म लिया. एक रिपोर्ट के अनुसार, धर्म के आधार पर भारत से अलग हुए पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान की करीब 6,100 किलोमीटर सीमाओं को ब्रिटिश न्यायाधीश सिरिल रैडक्लिफ ने मात्र 40 दिन निर्धारित कर दिया. भारत के इस विभाजन में लाखों लोगों की जानें चली गईं. हालांकि, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी इस विभाजन के पक्ष में नहीं थे. इसी विभाजन को ही पंजाब और कश्मीर में आतंकवाद के उदय का अहम कारण भी माना जाता है.

4. कश्मीर का भारत में विलय

भारत को स्वतंत्रता मिलने के दो महीने बाद 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. अगस्त में रियासत ने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ एक स्थिर व्यवस्था की मांग की थी, जिस पर भारत ने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. भारत कश्मीर को अपना अविभाज्य हिस्सा मानता था. इसी बीच, वर्ष 1948 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू कश्मीर मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चले गए. इसके बाद ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का एक खाका खींचा गया.

5. आबादी और आमदनी

एक रिपोर्ट के अनुसार, जब हम आजाद हुए थे तब देश की आबादी 34 करोड़ के आसपास थी. 1951 में देश की पहली जनगणना हुई. उस वक्त हमारी आबादी 36 करोड़ से थोड़ी ही अधिक थी. वहीं, देश के लोगों की सालाना आमदनी काफी कम थी. रिपोर्ट के अनुसार, आमदनी के हिसाब से वित्त वर्ष 1950-51 के दौरान भारत में एक आदमी की सालाना आमदनी मात्र 274 रुपये थी.

6. गरीबी रेखा

एक अनुमान के मुताबिक, आजादी के समय भारत में करीब 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे थे, जो उस वक्त की आबादी का 80 फीसदी होता है. हमारे देश में 1956 के बाद से गरीबी की संख्या का हिसाब-किताब रखा जाने लगा है. बीएस मिन्हास आयोग ने योजना आयोग को अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें अनुमान लगाया था कि 1956-57 में देश के 21.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे थे.

7. भारत का पहला प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर

वर्ष 1947 की आजादी के करीब चार साल बाद जुलाई 1951 को भारत में पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर की स्थापना की गई. इसकी परिकल्पना पूरी दुनिया में एक बेहतरी इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में की गई थी, जो वास्तव में राष्ट्र निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई. आज भारत में करीब 23 से अधिक आईआईटी और 20 अधिक आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) हैं.

8. बेरोजगारी

आजादी के समय देश में व्याप्त बेरोजगारी का कोई सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. बेरोजगारी को लेकर नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) ने 1972-73 में पहला सर्वे किया था. उस सर्वे के मुताबिक, उस वक्त देश में बेरोजगारी दर 8.35 फीसदी थी. सरकार की ओर से बेरोजगारी दर को लेकर आखिरी आंकड़ा 2020-21 का है. 2020-21 में हुए सर्वे के मुताबिक, देश में बेरोजगारी दर 4.2 फीसदी थी.

9. शिक्षा

सरकारी आंकड़ों की मानें तो 31 मार्च 1948 तक देश में 1.40 लाख के आसपास प्राइमरी और 12,693 मिडिल और हाई स्कूल थे. लेकिन आज देश में 15 लाख से ज्यादा स्कूल हैं. इसी तरह उस वक्त महज 414 कॉलेज हुआ करते थे और आज इनकी संख्या 42 हजार से ऊपर चली गई है. उस वक्त बजट भी मात्र 74 करोड़ रुपये हुआ करता था और 2022-23 में केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय को 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं.

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10. कृषि का योगदान

भारत कृषि प्रधान देश है. आजादी के वक्त देश की ज्यादातर आबादी खेती पर ही निर्भर थी. ऐसा अनुमान है कि उस वक्त 80 फीसदी से ज्यादा आबादी की आजीविका खेती से ही चलती थी. इतना ही नहीं, उस समय देश की जीडीपी में कृषि का योगदान भी करीब आधा हुआ करता था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1950-51 में देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 52 फीसदी के आसपास था, जो 2021-22 तक घटकर 20% से भी कम हो गया है. हालांकि, इस दौरान कृषि उत्पादन में जमकर बढ़ोतरी हुई है. खेती से जुड़े कामगारों की संख्या भी बढ़ी है. हमारे देश में सबसे पहले वर्ष 1966-67 से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू की गई. उस वक्त सिर्फ गेहूं को ही एमएसपी पर खरीदा जाता था. उस समय एक क्विंटल (100 किलो) गेहूं पर सरकार 54 रुपये एमएसपी देती थी.

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