हर साल 25 मिलीमीटर के हिसाब से डूब रहा है भारत का यह शहर, क्या तैयार हो रहा दूसरा जोशीमठ!

Published by : Pritish Sahay Updated At : 10 Jan 2023 5:13 PM

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शोध कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर भूजल शोधन से इसकी धार ऊपर की ओर हो जाती है. वहीं, छिद्र कम होने के कारण तल पर दबाव पड़ता है. इस कारण जमीन धंसने लगती है. इसके अलावा जमीन में दरार भी पड़ जाती है.

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उत्तराखंड का जोशीमठ शहर धंस रहा है. शहर में बने घर, सड़क और इमारत समेत सब कुछ धरती में समा रहा है. लेकिन क्या यह आंख खोलने वाली सच्चाई सिर्फ उत्तराखंड के जोशीमठ के लिए है. आज से करीब दो साल पहले एक स्टडी की रिपोर्ट आई थी. रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात के अहमदाबाद की जमीन भी हर साल कुछ मिलीमीटर धंस रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों ने अपनी जांच में पाया है कि अहमदाबाद की जमीन हर साल 25 मिमी धंस रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) के विशेषज्ञ लगातार जमीन के धंसने की निगरानी कर रहे हैं. अपनी जांच में विशेषज्ञों ने पाया कि 25 मिलीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब से इलाके की जमीन धंस रही है. भू धंसान मुख्य रूप से दक्षिण पूर्वी और पश्चिमी भूभागों में देखने के मिल रहा है. शहर के घोड़ासर, वटवा और हाथीजन इलाके में हर साल 20 से 25 मिलीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब के धंसान हो रहा है. घुमामा और बोपन इलाके में भी 15 मिलीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब से धंसान देखने को मिला है.

अपनी शोध में विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि अहमदाबाद के मध्य पूर्व और मध्य पश्चिम के कुछ और इलाकों में बहुत मंद गति से सालाना 2 से आठ मिलीमीटर प्रति वर्ष के हिसाब से अवतलन हो रहा है. शोध कर रहे विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर भूजल शोधन से इसकी धार ऊपर की ओर हो जाती है. वहीं, छिद्र कम होने के कारण तल पर दबाव पड़ता है. इस कारण जमीन धंसने लगती है. इसके अलावा जमीन में दरार भी पड़ जाती है.  

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गौरतलब है की इसी तरह के हालात फिलहाल उत्तराखंड में देखने को मिल रहा है. जहां जोशीमठ शहर में सड़कों पर दरार आ गयी हैं. इमारतें टूट रही हैं. इलाके के लोगों को वहां से हटाकर दूसरी जगह पर शिफ्ट किया गया है. इसके अलावा प्रशासन वहां बने घरों, जो रेड जोन में हैं, उन्हें तोड़ रहा है. ऐसे में अहमदाबाद के हालात इस तरह के न हो इसके लिए जरूरी है कि अभी से ही ऐहतिया बरती जाए. 

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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