किसान आंदोलन से पंजाब के अंधेरे में डूबने का खतरा, ट्रेन रोकने से थर्मल प्लांटों की कोयला सप्लाई बाधित

Author : संवाद न्यूज Published by : Prabhat Khabar Updated At : 11 Oct 2020 8:12 PM

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चंडीगढ़ : नये कृषि कानून में चल रहे किसान आंदोलन के कारण पंजाब के अंधेरे में डूबने की आशंका बढ़ गयी है. सात थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले का स्टाक खत्म हो रहा है और ट्रेनें रोके जाने के कारण सप्लाई नहीं हो पा रही है. इससे इन थर्मल प्लांटों में उत्पादन ठप होने की संभावना है. कोल इंडिया लिमिटेड ने पंजाब के पावर स्टेशनों को आंदोलन के कारण कोयले की आपूर्ति बंद कर दी है.

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चंडीगढ़ : नये कृषि कानून में चल रहे किसान आंदोलन के कारण पंजाब के अंधेरे में डूबने की आशंका बढ़ गयी है. सात थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले का स्टाक खत्म हो रहा है और ट्रेनें रोके जाने के कारण सप्लाई नहीं हो पा रही है. इससे इन थर्मल प्लांटों में उत्पादन ठप होने की संभावना है. कोल इंडिया लिमिटेड ने पंजाब के पावर स्टेशनों को आंदोलन के कारण कोयले की आपूर्ति बंद कर दी है.

पंजाब के जीवीके लिमिटेड, श्रीगोविंद साहिब, गुरुगोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट में नौ रैक से कम कोयला रह गया है. इससे एक-दो दिन में ही इन प्लांटों के बंद होने की संभावना है. पंजाब में किसान आंदोलन को लगभग 17 दिन हो गये हैं. सड़कों के साथ ही रेलवे ट्रैक पर भी किसान अपनी मांगों को मनवाने के लिए जमे हुए हैं. किसानों के इस आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव सूबे के बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है.

सरकारी प्रवक्ता ने पाइपलाइनों में रैक की स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि तलवंडी साबो पॉवर लिमिटेड में 38 रेक, नाभा पॉवर लिमिटेड (एनपीएल), राजपुरा (16 रैक), जीवीके लिमिटेड, श्री गोविंद साहिब (8 रैक), गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट, रोपड़ (3 रैक) और गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट, लेहरा मोहब्बत (4 रैक) फंसा हुआ है. कोयले की कोई निकासी नहीं है और कोल इंडिया लिमिटेड ने पंजाब में थर्मल पावर स्टेशनों के लिए कोयले की अधिक लोडिंग को रोक दिया है.

यूरिया और डीएपी की भी कमी

किसानों के विरोध प्रदर्शन के तहत रेलवे यातायात बाधित करने से पंजाब में यूरिया और डीएपी की भी कमी होने लगी है. सूबे में यूरिया की वर्तमान आवश्यकता 13.5 लाख टन है, जबकि अब तक की उपलब्धता केवल 1.7 लाख टन है. इसी तरह,डीएपी की 6 लाख मीट्रिक टन आवश्यकता के अनुरूप इसकी उपलब्धता अभी सिर्फ 4.6 लाख मीट्रिक टन है. इससे खेती प्रभावित होगी.

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