तेलंगाना में शराब और मांस की सबसे अधिक खपत, राज्यों की सूची में टॉप पर, देखें खास रिपोर्ट

तेलंगाना में देश भर में मांसाहारियों की संख्या सबसे अधिक है. यहां भेड़ और बकरियों के मांस की मांग तेजी से बढ़ी है. जिस कारण एक किलो मांस की कीमत बढ़कर 800 से 1,000 रुपये हो गयी है.
शराब और मांस की सबसे अधिक खपत के मामले में तेलंगाना देश का अग्रणी राज्य बन गया है. तेलंगाना राज्य भेड़ और बकरी विकास सहकारी संघ लिमिटेड ने जो रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है, उसके अनुसार तेलंगाना में मांस की राष्ट्रीय वार्षिक प्रति व्यक्ति खपत 21.7 किलोग्राम है.
तेलंगाना में इतनी है शराब की खपत
तेलंगाना में शराब पीने वालों की संख्या राष्ट्रीय औसत से 17.3 प्रतिशत अधिक है. शराब की खपत पर सर्वेक्षण केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया था.
तेलंगाना में मांसाहारियों की संख्या देशभर से सबसे अधिक
तेलंगाना में देश भर में मांसाहारियों की संख्या सबसे अधिक है. यहां भेड़ और बकरियों के मांस की मांग तेजी से बढ़ी है. जिस कारण एक किलो मांस की कीमत बढ़कर 800 से 1,000 रुपये हो गयी है.
पिछले साल तेलंगाना में रिकॉर्ड 9.75 लाख टन मांस का उत्पादन
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तेलंगाना में लोग सप्ताह में तीन से चार बार भोजन में मांस का सेवन करते हैं. रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि पिछले साल राज्य में रिकॉर्ड 9.75 लाख टन मांस का उत्पादन किया गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेड़ और बकरी के मांस की कीमत प्रति किलोग्राम 600 से 700 रुपये है, जबकि तेलंगाना में 1000 रुपये है.
देश के अन्य राज्यों की तुलना में तेलंगाना में सबसे अधिक शराब की खपत
एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में तेलंगाना में सबसे अधिक लोग शराब का सेवन करते हैं. रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य की आबादी का 19 प्रतिशत लोग शराब का सेवन करते हैं. जो की राष्ट्रीय औसत से 17.2 प्रतिशत अधिक है.
तेलंगाना के बाद आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक शराबी
रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के बाद सबसे अधिक शराब की खपत करने वाला राज्य आंध्र प्रदेश है. आंध्र प्रदेश में कुल आबादी का 17.3 प्रतिशत जनसंख्या शराब का सेवन करती है. इसके बाद छत्तीसगढ़ का नंबर आता है. इस राज्य में 43.5 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 29.5 प्रतिशत, गोवा में 28 प्रतिशत, पंजाब में 25.2 प्रतिशत, दिल्ली में 25 प्रतिशत, उत्तराखंड में 23.2 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 21.4% प्रतिशत, ओडिशा में 21.4 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 18.2 प्रतिशत.
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By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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