चट मंगनी, पट ब्याह की तरह अब हो सकता है 'तुरंत तलाक', जानिए क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Published by : Agency Updated At : 01 May 2023 6:27 PM

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जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले में कहा कि हमने अपने निष्कर्षों के अनुरूप, व्यवस्था दी है कि इस अदालत के लिए किसी शादीशुदा रिश्ते में आई दरार के भर नहीं पाने के आधार पर उसे खत्म करना संभव है. यह सरकारी नीति के विशिष्ट या बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होगा.

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कर्नाटक चुनाव: आरक्षण पर बंजारा, भोवी समुदायों को तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान सामने आया है. पति-पत्नी की आपसी सहमति से तलाक की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी की है. इस फैसले के तहत अब झट तलाक भी हो सकता है. तलाक मामले पर सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा, अगर संबंधों को जोड़ना संभव न हो तो कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिले विशेष अधिकारों का इस्तेमाल कर तलाक पर फैसला दे सकता है. बता दें, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में गुजारा भत्ता सहित अन्य प्रावधानों को भी शामिल किया गया है.

पांच जजों की बेंच ने की सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति एसके कौल की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले में कहा कि हमने अपने निष्कर्षों के अनुरूप, व्यवस्था दी है कि इस अदालत के लिए किसी शादीशुदा रिश्ते में आई दरार के भर नहीं पाने के आधार पर उसे खत्म करना संभव है. यह सरकारी नीति के विशिष्ट या बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होगा. पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति ए एस ओका, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी भी शामिल हैं.

29 सितंबर से कोर्ट ने रखा था मामला सुरक्षित: पीठ की ओर से न्यायमूर्ति खन्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा, हमने कहा है कि इस अदालत के दो फैसलों में उल्लेखित जरूरतों और शर्तों के आधार पर छह महीने की अवधि दी जा सकती है. शीर्ष अदालत ने पिछले साल 29 सितंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था. उसने दलीलों पर सुनवाई करते हुए कहा कि सामाजिक परिवर्तनों में थोड़ा समय लगता है और कई बार कानून बनाना आसान होता है लेकिन समाज को इसके साथ बदलाव के लिए मनाना मुश्किल होता है.

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पीठ इस बात पर भी विचार कर रही थी कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत इसकी व्यापक शक्तियां ऐसे परिदृश्य में किसी भी तरह से अवरुद्ध होती हैं, जहां किसी अदालत की राय में शादीशुदा संबंध इस तरह से टूट गया है कि जुड़ने की संभावना नहीं है लेकिन कोई एक पक्ष तलाक में अवरोध पैदा कर रहा है.

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