दागी माननीयों के खिलाफ तेज सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी, जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कुल 4984 मामले लंबित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Feb 2022 8:55 AM
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ कुल 4,984 मामले लंबित हैं, जिनमें 1,899 मामले पांच साल से अधिक पुराने हैं.
नई दिल्ली : सियासी गलियारे के दागी माननीयों के खिलाफ दायर याचिका पर तेजी से सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है. सर्वोच्च अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसारिया ने दागी सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों के खिलाफ याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट इन दागी सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई और इन मामलों में तेज गति से जांच कराए जाने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका शीघ्र सूचीबद्ध करने के आग्रह पर विचार करने पर सहमत हो गया.
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसारिया के इस अभ्यावेदन पर गौर किया कि याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की जरूरत है. हंसारिया ने कहा कि मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों एवं विधान परिषद के सदस्यों के खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी देते हुए एक नवीनतम रिपोर्ट अदालत को सौंपी गई है तथा लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निपटारे के लिए तत्काल एवं कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है. इस पर पीठ ने कहा कि हम देखेंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ कुल 4,984 मामले लंबित हैं, जिनमें 1,899 मामले पांच साल से अधिक पुराने हैं. इसमें बताया गया है कि दिसंबर 2018 तक कुल लंबित मामले 4,110 थे और अक्टूबर 2020 तक ये 4,859 थे. अधिवक्ता स्नेहा कलिता के माध्यम से दाखिल रिपोर्ट में कहा गया है कि चार दिसंबर 2018 के बाद 2,775 मामलों के निस्तारण के बावजूद सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले 4,122 से बढ़कर 4984 हो गये.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इससे पता चलता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और भी अधिक लोग संसद और राज्य विधानसभाओं में पहुंच रहे हैं. यह अत्यधिक आवश्यक है कि लंबित आपराधिक मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए तत्काल और कठोर कदम उठाए जाएं.’ सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने तथा सीबीआई एवं अन्य एजेंसियों द्वारा शीघ्रता से जांच कराने के लिए भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर कोर्ट समय-समय पर निर्देश दे रहा है.
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वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र विजय हंसारिया ने कहा कि उच्च न्यायालयों द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट से भी प्रदर्शित होता है कि कुछ राज्यों में विशेष अदालतें गठित की गई हैं, जबकि अन्य में संबद्ध क्षेत्राधिकार की अदालतें समय-समय पर जारी निर्देशों के आलोक में सुनवाई कर रही है.
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