Stray Dogs : अदालत के आदेश के प्रति कोई सम्मान नहीं, आवारा कुत्तों के मामले में लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 31 Oct 2025 11:44 AM
सुप्रीम कोर्ट
Stray Dogs : आवारा कुत्तों के मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को अदालत में डिजिटल माध्यम से पेश होने दिया जाए. जानें इसपर शीर्ष कोर्ट ने क्या कहा?
Stray Dogs : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की यह मांग खारिज कर दी कि राज्यों के मुख्य सचिव आवारा कुत्तों के मामले में वर्चुअली पेश हों. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सभी मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा. कोर्ट ने कहा कि यहां अदालत के आदेश के प्रति कोई सम्मान नहीं है, राज्य के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को प्रत्यक्ष रूप से पेश होने दें.
मुख्य सचिवों को खुद आना होगा : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अदालत के आदेशों का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा. राज्य के मुख्य सचिवों को खुद आना होगा.” कोर्ट का यह सख्त रुख इसलिए आया क्योंकि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अब तक यह नहीं बता पाए हैं कि उन्होंने एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों के तहत क्या कदम उठाए हैं.
हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया गया : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर को आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को तीन नवंबर को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया. अदालत ने पूछा है कि 22 अगस्त के आदेश के बावजूद अब तक अनुपालन हलफनामा क्यों दाखिल नहीं किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को इस मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर से बढ़ाकर पूरे देश तक कर दिया था और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को इस मुद्दे में पक्षकार बनाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी का हलफनामा दाखिल करें. इसमें कुत्तों के लिए बने बाड़ों, पशु चिकित्सकों, कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मियों, विशेष वाहनों और पिंजरों जैसी सुविधाओं का पूरा ब्यौरा शामिल हो. अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस मामले में पक्षकार बनाया था और कहा था कि एबीसी नियम पूरे देश में एक समान रूप से लागू किए जाने चाहिए.
स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है कोर्ट
कोर्ट एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है जो 28 जुलाई को दिल्ली में आवारा कुत्तों के काटने से विशेष रूप से बच्चों में रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट आने के बाद शुरू किया गया था.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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