IAS कैडर रूल्स में संशोधन को लेकर कई राज्यों ने किया कड़ा विरोध, जानें क्यों मचा है बवाल ?

आईएएस प्रतिनियुक्ति नियम के बदलाव के विरोध में गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विरोध कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र , छत्तीसगढ़, राजस्थान के बाद अब तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर विरोध दर्ज कराया है.
आईएएस प्रतिनियुक्ति नियमों में प्रस्तावित संसोधन के बाद कई राज्यों ने अपना विरोध दर्ज किया है. अब इस कड़ी में तेलंगाना का भी नाम शामिल हो गया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस नियम के बदलाव का विरोध किया है.
आईएएस प्रतिनियुक्ति नियम के बदलाव के विरोध में गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विरोध कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र , छत्तीसगढ़, राजस्थान के बाद अब तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर विरोध दर्ज कराया है. केरल और तमिलनाडु ने भी इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कर दी है. इसे लेकर कई राज्यों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर इस पर केंद्र विचार नहीं करता है तो वह आंदोलन करेंगे.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस कानून संघीय ढांचे के खिलाफ बताता है. कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने भी जो चिट्ठी प्रधानमंत्री को लिखी है उसमें इसे संघीय ढाचे के खिलाफ करार दिया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने चिट्ठी में पहला विरोध इसी आधार पर दर्ज किया है. सरकार के इस नये प्रस्ताव के खिलाफ कई राज्यों के मुखिया विरोध कर रहे हैं.
केंद्र में नियुक्ति के लिए IAS की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता का हवाला देते हुए मोदी सरकार ने आईएएस अफसरों की नियुक्ति के नियम में संशोधन का प्रस्ताव दिया. केंद्र ने राज्यों से 25 जनवरी तक इस पर राय मांगी थी. अब केंद्र सरकार बजट सत्र में इस संशोधन को पेश कर सकती है एक जनवरी 2021 तक देश में कुल 5200 आईएएस ऑफिसर थे, जिनमें से 458 केंद्र में नियुक्त थे.
अब आपके लिए जरूरी है कि इस नये प्रस्ताव में क्या है, इसे विस्तार से समझ लें. राज्य विरोध कर रहे हैं इसका सीधा अर्थ है कि इस लेकर राज्य के पास अधिकार कम होंगे. जो बदला है वो ये कि अगर राज्य किसी अधिकारी को केंद्र में भेजने में देरी करते हैं, तो उस अधिकारी को कैडर से रिलीव कर दिया जाएगा.
केंद्र सरकार ही केंद्र में पोस्ट होने वाले अधिकारियों की संख्या तय करेगी और राज्य को यह मानना होगा. अगर अधिकारी को लेकर राज्य और केंद्र के बीच कोई मतभेद है तो केंद्र का फैसला अंतिम होगा. केंद्र को जनहित में अधिकारियों की जरूरत होने पर राज्य तय समय में उन्हें रिलीव कर देगा. मौजूदा नियम के अनुसार राज्यों से अधिकारियों को रिलीव न करने से केंद्र में अधिकारियों की लंबे समय से कमी चल रही है.
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