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Sindhu Water: देश व किसानों के हित में किया जायेगा सिंधु जल का उपयोग

Updated at : 19 May 2025 7:53 PM (IST)
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shivraj singh chouhan

सिंधु जल के पानी को देश और किसानों के उपयोग में लाने को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को किसान संगठनों के साथ संवाद के दौरान कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने तब कहा था, ये संधि तो होती नहीं, अगर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इसमें दखल नहीं देते. एक बहस के दौरान पंडित नेहरू ने कहा कि हमने 83 करोड़ रु. देकर शांति खरीदी है, ये कैसी शांति थी, पानी भी गया, पैसा भी गया.

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Sindhu Water: सिंधु जल संधि के संबंध में मोदी सरकार के फैसले को लेकर किसान संगठनों के साथ सोमवार को दिल्ली में पूसा परिसर स्थित शिंदे सभागृह में महत्वपूर्ण संवाद किया गया. विभिन्न राज्यों से आए किसान संगठनों ने एक सुर से मोदी सरकार के सिंधु जल संधि संबंधी निर्णय का स्वागत किया. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सिंधु जल संधि देश के साथ अन्याय था, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को दे दिया था, केवल पानी ही नहीं दिया, पानी के साथ 83 करोड़ रुपये भी दिए, जिसकी वर्तमान में कीमत 5 हजार 500 करोड़ रुपये है. शिवराज सिंह ने कहा कि जल विशेषज्ञों के विरोध के बावजूद पं. नेहरू ने संधि के लिए विवश किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त  करने का काम किया है. 


इस पानी का उपयोग अब देश एवं किसानों के हित में किया जाएगा


सिंधु जल संधि को स्थगित किये जाने को असाधारण फैसला बताते हुए शिवराज ने कहा कि  बड़ा अन्याय देश के साथ हुआ था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 1960 में संसद में भाषण दिया था. लोकसभा के डिबेट के सेकेंड सीरीज के खंड 48 के पेज नंबर 3165 से लेकर 3240 पर ये लेख प्रकाशित हुआ जिसमें अटलजी ने विरोध किया और कहा कि विशेषज्ञ प्रतिनिधियों के बात को खारिज कर समझौता किया गया जो नहीं होना चाहिए था. उस समय चाहते तो पाकिस्तान को कम पानी देकर भी तैयार कर लेते. पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने कहा कि ये संधि तो होती नहीं, अगर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू इसमें दखल नहीं देते.

एक बहस के दौरान पंडित नेहरू ने कहा कि हमने 83 करोड़ रु. देकर शांति खरीदी है, ये कैसी शांति थी, पानी भी गया, पैसा भी गया. किसान संगठनों की ओर से अशोक बालियान, धर्मेंद्र मलिक, सत्यनारायण नेहरा, कृपा सिंह नाथूवाला, सतविंदर सिंह कलसी, मानकराम परिहार, सतीश छिकारा, बाबा श्याम सिंह, श्री बाबा, मूलचंद सेहरावत, प्रो. वी.पी.सिंह,राजेश सिंह चौहान, सुशीला बिश्नोई, रामपाल सिंह जाट आदि ने भी अपने विचार रखे.

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Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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